बदरीनाथ से सहस्रधारा आ रहा हेलीकॉप्टर हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका, राहत-बचाव अभियान तेज

मुख्यमंत्री धामी ने दिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश, SDRF, सेना, ITBP, NDRF और पुलिस की टीमें मौके के लिए रवाना

देहरादून। श्री बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड आ रहा ट्रांस भारत कंपनी का सिविल हेलीकॉप्टर चमोली जिले के हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। हेलीकॉप्टर में पांच यात्रियों और एक पायलट सहित कुल छह लोग सवार थे। उनकी तलाश के लिए जमीनी और हवाई दोनों स्तरों पर सघन अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने और सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री स्वयं पूरे अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं।

SDRF, सेना, ITBP और NDRF की टीमें रेस्क्यू में जुटीं

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में SDRF, भारतीय सेना, ITBP, NDRF, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गई हैं। बचाव दल हेलीकॉप्टर के संभावित दुर्घटनास्थल तक पहुंचने और उसमें सवार यात्रियों की तलाश में जुटे हैं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में घटनास्थल तक पहुंचने के लिए जमीनी और हवाई दोनों माध्यमों से प्रयास किए जा रहे हैं।

सेना की सिग्नल सेंटर टीम ने देखा धुआं

सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास के अनुसार, शुक्रवार को अपराह्न करीब दो बजे जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली से सूचना मिली कि बदरीनाथ से सहस्रधारा आ रहा ट्रांस भारत कंपनी का हेलीकॉप्टर हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सेना की सिग्नल सेंटर टीम ने संबंधित क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से धुआं उठता हुआ और उसे तेजी से नीचे की ओर जाते हुए देखा था। इसके बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संबंधित बचाव एजेंसियों को सक्रिय करते हुए घटनास्थल के लिए रवाना किया।

श्रीनगर बेस अस्पताल और एम्स ऋषिकेश हाई अलर्ट पर

रेस्क्यू अभियान के साथ ही घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी भी की गई है। प्रशासन ने बेस अस्पताल श्रीनगर, एम्स ऋषिकेश और संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर घायलों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने भी घटना की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और उन्हें शीघ्र सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासन और प्रशासन स्तर पर पूरे अभियान की लगातार समीक्षा की जा रही है।

मुख्य सचिव और DGP लगातार कर रहे निगरानी

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव गृह शैलेश बगौली और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ भी घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के माध्यम से उन्हें राहत एवं बचाव अभियान की नियमित जानकारी दी जा रही है।

मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों और बचाव एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि घटनास्थल तक जल्द पहुंचने और हेलीकॉप्टर में सवार यात्रियों की तलाश के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जाए।

हवाई रेकी के लिए दो हेलीकॉप्टर लगाए गए

सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास ने बताया कि घटनास्थल की स्थिति का पता लगाने और वहां तक पहुंचने के लिए हवाई रेकी भी की जा रही है। इसके लिए UCADA के एक रेकी हेलीकॉप्टर और एक रिट्रीवर हेलीकॉप्टर की सहायता ली जा रही है।

इसके अतिरिक्त सहस्रधारा से SDRF की एक अन्य टीम भी घटनास्थल के लिए रवाना की गई है। आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी (सेवानिवृत्त) और अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी भी राज्य आपदा परिचालन केंद्र पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से घटना की विस्तृत जानकारी लेकर विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और बचाव अभियान की निगरानी की।

यात्रियों की तलाश सर्वोच्च प्राथमिकता

हाथी पर्वत क्षेत्र में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका के बाद राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। मुख्यमंत्री धामी से लेकर शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

फिलहाल हेलीकॉप्टर में सवार पायलट और पांच यात्रियों की तलाश के लिए अभियान जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि बचाव दल जल्द से जल्द घटनास्थल तक पहुंचें और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

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