देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला देहरादून में एक दिव्यांग बुजुर्ग की संपत्ति से जुड़े कथित धोखाधड़ी विवाद से शुरू हुआ, लेकिन अब इसमें हरक सिंह रावत के पारिवारिक रिश्तों और वर्ष 2003 के चर्चित जेनी प्रकरण की भी चर्चा होने लगी है।
एक तरफ बुजुर्ग हरिओम सहगल ने संपत्ति के सौदे में धोखाधड़ी और कब्जे के आरोप लगाए हैं, तो दूसरी तरफ हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत ने सोनिया आनंद को उनकी पत्नी बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। वहीं, सोनिया आनंद ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए इसे बदनाम करने की साजिश करार दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

56 लाख के संपत्ति सौदे से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत देहरादून के कांदली क्षेत्र निवासी दिव्यांग बुजुर्ग हरिओम सहगल की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 21 जून 2021 को उन्होंने जसबीर कौर आनंद को अपनी संपत्ति 56 लाख रुपये में बेची थी।
हरिओम सहगल का आरोप है कि सौदे के तहत उन्हें केवल 12.80 लाख रुपये मिले, जबकि शेष भुगतान के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए। उन्होंने संपत्ति पर कब्जा करने, मारपीट और धमकी देने के आरोप भी लगाए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के एसएसपी ने जांच एसपी सिटी को सौंप दी है। हालांकि, इस मामले में आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

दीप्ति रावत का वीडियो, कहा- मैं हरक सिंह रावत की पत्नी हूं
मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब सोशल मीडिया पर दीप्ति रावत का वीडियो सामने आया। उन्होंने सोनिया आनंद को हरक सिंह रावत की पत्नी बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।
दीप्ति रावत ने स्पष्ट कहा कि वह हरक सिंह रावत की पत्नी हैं और सोशल मीडिया पर किसी दूसरी महिला को उनके पति की पत्नी बताकर प्रचारित करना उनके और उनके परिवार के लिए मानसिक पीड़ा का कारण बन रहा है।
उन्होंने ऐसे प्रचार के खिलाफ न्यायालय जाने की बात भी कही है। दीप्ति रावत के इस बयान के बाद मामला केवल संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक रूप से रिश्तों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सोनिया आनंद का पलटवार, आरोपों को बताया साजिश
दूसरी तरफ जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद ने भी सामने आकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए धोखाधड़ी और संपत्ति कब्जाने के आरोपों को निराधार बताया है।
सोनिया आनंद का कहना है कि संपत्ति के सौदे की पूरी रकम संबंधित व्यक्ति और उनकी पत्नी को दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, भुगतान से संबंधित दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं और वह पुलिस जांच में सभी दस्तावेज उपलब्ध कराकर सहयोग करेंगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही है। इस तरह शिकायतकर्ता और सोनिया आनंद के दावों में विरोधाभास है, जिसका फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकेगा।
2003 का जेनी प्रकरण फिर चर्चा में
इस पूरे विवाद के बीच वर्ष 2003 का चर्चित जेनी प्रकरण भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
दरअसल, वर्ष 2003 में जेनी नाम की महिला ने तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय मामला उत्तरांचल विधानसभा तक पहुंचा था और राजनीतिक दबाव के बीच हरक सिंह रावत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और जुलाई 2003 में सीबीआई ने महिला की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था।
इस पुराने प्रकरण का जिक्र अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी किया है। उन्होंने एक नवंबर को मीडिया से बातचीत में जेनी के बच्चे के पिता को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, इस प्रकरण में बाद की मीडिया रिपोर्टों में डीएनए जांच का हवाला देते हुए हरक सिंह रावत से बच्चे का जैविक संबंध स्थापित नहीं होने की बात भी सामने आई थी। इसलिए पुराने आरोपों को वर्तमान विवाद से जोड़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच हरक सिंह रावत का पक्ष भी अहम
मौजूदा विवाद में एक तरफ संपत्ति के लेन-देन को लेकर पुलिस जांच चल रही है, दूसरी तरफ दीप्ति रावत और सोनिया आनंद के सार्वजनिक बयान सामने आ चुके हैं।
ऐसे में हरक सिंह रावत का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण हो गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने देहरादून लौटकर पूरे मामले के तथ्य सामने रखने की बात कही है।
जांच और कानूनी कार्रवाई से खुलेगा मामले का सच
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में तीन प्रमुख सवाल चर्चा में हैं। पहला, क्या संपत्ति के सौदे में वास्तव में तय रकम का भुगतान हुआ था? दूसरा, शिकायतकर्ता और सोनिया आनंद के बीच लेन-देन से जुड़े दस्तावेज क्या बताते हैं? और तीसरा, सोशल मीडिया पर रिश्तों को लेकर किए जा रहे दावों की वास्तविकता क्या है?
इन सवालों का जवाब पुलिस जांच, संबंधित दस्तावेजों और न्यायालय की प्रक्रिया से ही सामने आएगा। उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हरक सिंह रावत के लिए यह विवाद राजनीतिक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के अगले कदम पर टिकी है।
