देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत से जुड़ा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। दिव्यांग बुजुर्ग की संपत्ति से जुड़े कथित धोखाधड़ी प्रकरण के बाद अब जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत के नाम परिवर्तन से संबंधित दस्तावेज सामने आने का दावा किया जा रहा है। इन दस्तावेजों में वर्ष 2023 के सरकारी गजट नोटिफिकेशन और नाम परिवर्तन के शपथपत्र का हवाला दिया जा रहा है।
दावा है कि सरकारी गजट में जसबीर कौर का नाम बदलकर सोनिया आनंद रावत किए जाने का उल्लेख है। साथ ही दस्तावेज में ‘जसबीर कौर पत्नी हरक सिंह’ का विवरण दर्ज होने की बात कही जा रही है। यदि दस्तावेजों की प्रमाणिकता और उनमें दर्ज विवरण की पुष्टि होती है, तो यह मौजूदा विवाद में एक महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है।
2023 के गजट नोटिफिकेशन ने बढ़ाई चर्चा
इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा वर्ष 2023 के कथित सरकारी गजट नोटिफिकेशन को लेकर हो रही है। सामने आए दस्तावेज के बारे में दावा किया जा रहा है कि इसमें जसबीर कौर ने अपना नाम बदलकर सोनिया आनंद रावत रखने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की थी।
दस्तावेज में पति के नाम के रूप में हरक सिंह का उल्लेख होने का दावा भी किया गया है। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर दोनों के रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
हालांकि, नाम परिवर्तन का गजट किसी व्यक्ति की पहचान और नाम बदलने की प्रक्रिया का दस्तावेजी प्रमाण हो सकता है, लेकिन रिश्ते की वर्तमान कानूनी स्थिति और उससे जुड़े अन्य पहलुओं को समझने के लिए पूरे दस्तावेज तथा संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन आवश्यक है।
दीप्ति रावत के बयान के बाद बढ़ा विवाद
इससे पहले हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत ने सोशल मीडिया पर सामने आए दावों पर आपत्ति जताते हुए खुद को हरक सिंह रावत की पत्नी बताया था। उन्होंने किसी दूसरी महिला को उनके पति की पत्नी बताकर प्रचारित किए जाने को परिवार के लिए मानसिक प्रताड़ना करार दिया और न्यायालय जाने की चेतावनी दी थी।
अब नाम परिवर्तन के कथित गजट दस्तावेज सामने आने के बाद इस विवाद ने फिर से तूल पकड़ लिया है। सवाल यह है कि दस्तावेजों में दर्ज विवरण और संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों के बीच उठ रहे सवालों पर हरक सिंह रावत और अन्य संबंधित पक्ष क्या स्पष्टीकरण देते हैं।
संपत्ति विवाद से शुरू हुई कहानी अब रिश्तों तक पहुंची
गौरतलब है कि देहरादून के कांदली निवासी दिव्यांग बुजुर्ग हरिओम सहगल ने जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत पर संपत्ति के सौदे में धोखाधड़ी, बकाया भुगतान नहीं करने और जबरन कब्जे के आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2021 में संपत्ति का सौदा 56 लाख रुपये में हुआ था। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्हें केवल 12.80 लाख रुपये मिले और शेष रकम के चेक बाउंस हो गए। मामले में देहरादून के एसएसपी ने एसपी सिटी को जांच सौंपी है।
इस तरह एक संपत्ति विवाद से शुरू हुआ मामला अब नाम परिवर्तन के दस्तावेजों और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े सवालों तक पहुंच गया है।
अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
वर्ष 2023 के कथित गजट नोटिफिकेशन ने इस विवाद को नया आधार जरूर दिया है, लेकिन पूरे मामले में दस्तावेजों का आधिकारिक सत्यापन और संबंधित पक्षों का स्पष्टीकरण बेहद महत्वपूर्ण है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि हरक सिंह रावत इस दस्तावेज को लेकर क्या कहते हैं, दीप्ति रावत आगे क्या कानूनी कदम उठाती हैं और पुलिस की जांच में संपत्ति विवाद को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बने इस प्रकरण में फिलहाल दस्तावेज, आरोप और संबंधित पक्षों के बयान ही केंद्र में हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकेगा।
प्रकाशन से पहले जरूरी: 2023 के गजट की मूल प्रति, विज्ञापन संख्या, प्रकाशन तिथि और संबंधित शपथपत्र की पुष्टि कर लें। अभी उपलब्ध कराए गए विवरण के आधार पर मैंने दस्तावेज को सत्यापित तथ्य की तरह प्रस्तुत नहीं किया है।
