उत्तराखंड में ऐतिहासिक शैक्षिक सुधार: ‘अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’ प्रभावी, मदरसा बोर्ड पूरी तरह समाप्त

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों से जोड़ने की दिशा में धामी सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’ को पूरी तरह से प्रभावी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से इस युगांतकारी निर्णय की आधिकारिक घोषणा की है। इस नए अधिनियम के लागू होने के साथ ही राज्य में वर्षों से चला आ रहा मदरसा शिक्षा बोर्ड और उससे जुड़े पुराने नियम तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गए हैं।

मदरसा बोर्ड का अंत और नए प्राधिकरण का उदय

नए अधिनियम के प्रभावी होने से उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के ढांचे में व्यापक और सकारात्मक बदलाव आए हैं। राज्य में अब ‘मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम’ और ‘गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम’ पूरी तरह से इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। इनके स्थान पर बुधवार से नया ‘राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ पूरी तरह अस्तित्व में आ गया है। इस व्यवस्था के लागू होने से अब अल्पसंख्यक संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा, जिसके तहत उन्हें अब एनसीईआरटी (NCERT) के पाठ्यक्रम की किताबें पढ़ाई जाएंगी। इससे अल्पसंख्यक समुदायों के नौनिहालों को आधुनिक वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाया जा सकेगा।

आधुनिक और राष्ट्र निर्माण पर आधारित शिक्षा: सीएम धामी

इस बड़े बदलाव पर अपनी सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि यह कदम राज्य के भविष्य को संवारने वाला साबित होगा।

मुख्यमंत्री का संदेश: “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है जो आधुनिक, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण, जवाबदेह और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर आधारित हो। नई व्यवस्था सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए समान एवं पारदर्शी मान्यता प्रणाली सुनिश्चित करेगी। हमारा संकल्प स्पष्ट है कि प्रदेश का नौनिहाल आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल और भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाए। इसी लक्ष्य के साथ हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।”

प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी की अध्यक्षता में नया प्राधिकरण गठित

इस नई व्यवस्था को सुचारू और प्रभावी रूप से संचालित करने के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का विधिवत गठन पहले ही किया जा चुका है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को इस नए प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिष्ठित विद्वानों और शिक्षाविदों को सदस्य के तौर पर इसमें शामिल किया गया है ताकि व्यवस्था को समावेशी और संतुलित बनाया जा सके।

प्राधिकरण के सम्मानित सदस्यों में प्रोफेसर राकेश कुमार जैन, डॉ सैयद अली हामिद, प्रोफेसर पेमा तेनजिंग, प्रोफेसर गुरमीत सिंह, डॉ एल्बा मंड्रेले, प्रोफेसर रॉबिन अमन, चंद्रशेखर भट्ट और राजेंद्र सिंह बिष्ट शामिल हैं। प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए महानिदेशक (विद्यालय शिक्षा) और निदेशक (SCERT) को इस प्राधिकरण का पदेन सदस्य मनोनीत किया गया है, जबकि निदेशक (अल्पसंख्यक कल्याण) पदेन सदस्य सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। सरकार की यह नई नीति अल्पसंख्यक संस्थानों में भाई-भतीजावाद और अपारदर्शिता को खत्म कर एक समान शिक्षा प्रणाली की नींव रखेगी।

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