इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन पर जोर, फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स और वन्यजीव कॉरिडोर जैसी उपलब्धियों को मुख्यमंत्री ने किया रेखांकित
देहरादून
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में भारतीय वन सेवा (IFS) के परिवीक्षार्थियों के लिए आयोजित संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल श्री गुरमीत सिंह (से.नि.) मुख्य रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड आगमन पर उपराष्ट्रपति का हार्दिक स्वागत किया तथा सभी नवचयनित आईएफएस अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं।
वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि भविष्य का संकल्प
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं। उन्होंने अधिकारियों का आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक, ज्ञान और प्रशासनिक दक्षता का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता दें। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन LiFE’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे जन-अभियानों का उल्लेख करते हुए पर्यावरण व विकास में संतुलन साधने पर विशेष बल दिया।
पर्यावरण संरक्षण एवं आधुनिक नवाचारों में उत्तराखंड अग्रणी
राज्य सरकार द्वारा वन और पर्यावरण क्षेत्र में उठाए गए ऐतिहासिक कदमों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदु साझा किए:
-
अतिक्रमण पर प्रहार: देश के सबसे बड़े अभियानों में से एक चलाकर लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया।
-
फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स: उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित ‘फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स’ का गठन किया गया है।
-
डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम: प्लास्टिक कचरा प्रबंधन हेतु चारधाम यात्रा मार्ग पर इसे लागू किया गया है, जिसका विस्तार अब अन्य क्षेत्रों में भी किया जाएगा।
-
वन्यजीव संरक्षण: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर राजाजी टाइगर रिजर्व में 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर पर्यावरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है।
जनहित और वन्यजीव सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज के सुगम परिवहन के लिए ‘नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम’ लागू किया गया है। इसके अलावा, मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि पर अनुग्रह राशि बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है। वनाग्नि से बचाव के लिए फायर वॉचर्स हेतु जीवन बीमा तथा पिरुल एकत्रीकरण के जरिए स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने हेतु बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल और 24 घंटे सक्रिय हेल्पलाइन (1926) जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी युवा अधिकारियों से राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक श्रीमती अजीता लोंग जाम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
