देहरादून, 16 जुलाई 2026
सार्वजनिक शांति व्यवस्था बनाए रखने और ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए देहरादून पुलिस ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून के निर्देशों पर दून पुलिस ने जिलेभर में एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया।
इस कार्रवाई के तहत नियमों के विपरीत और तय मानकों से अधिक तेज आवाज में बजने वाले लाउडस्पीकरों को चिन्हित कर 43 धार्मिक स्थलों से हटवा दिया गया है।
पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड के साथ संयुक्त कार्रवाई
एसएसपी के सख्त रुख के बाद दून पुलिस की अलग-अलग टीमों ने पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड (Pollution Control Board) के अधिकारियों के साथ मिलकर जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर लगे ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकरों) की आवाज को डेसिबल मीटर से मापा।
जांच के दौरान जिन 43 धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक तेज आवाज में संचालित होते पाए गए, उन्हें मौके पर ही हटवाने की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही प्रबंधकों को सख्त हिदायत दी गई कि भविष्य में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति और तय मानकों के लाउडस्पीकर न बजाए जाएं।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सीधे विधिक कार्रवाई
अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने धार्मिक स्थलों के प्रबंधकों और संबंधित व्यक्तियों को ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमों के प्रति जागरूक भी किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि माननीय न्यायालय के आदेश और शासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।
दून पुलिस ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि इस अभियान के बाद भी यदि किसी क्षेत्र या संस्थान में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों या प्रबंधकों के खिलाफ संबंधित अधिनियमों के तहत सीधे कानूनी (विधिक) कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सार्वजनिक शांति और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
दुकानदारों, बैंक्वेट हॉलों और धार्मिक स्थलों पर ध्वनि मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आम जनता को ध्वनि प्रदूषण से राहत देना और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों को धरातल पर पूरी तरह लागू करना है, ताकि सार्वजनिक शांति व्यवस्था बनी रहे।
