ऋषिकेश। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना के निर्माण कार्य में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) के ऋषिकेश PIU द्वारा एस्केप टनल-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस उपलब्धि के साथ परियोजना में अब तक कुल 41 टनल ब्रेकथ्रू पूरे हो चुके हैं।
10.847 किलोमीटर लंबी टनल हुई आरपार
एस्केप टनल-1 की कुल लंबाई 10.847 किलोमीटर है। अंतिम ब्रेकथ्रू के साथ अब यह टनल पूरी तरह आरपार जुड़ गई है। यह परियोजना की दूसरी सबसे लंबी टनल है।
इस टनल का निर्माण हिमालय की बेहद चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय परिस्थितियों के बीच किया गया। निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग टीम को जटिल और अस्थिर रॉक संरचनाओं का सामना करना पड़ा।
Highly Tectonized और Faulted रॉक मास बनी बड़ी चुनौती
एस्केप टनल-1 का पूरा क्षेत्र Highly Tectonized, Multi-folded और Extensively Faulted Rock Mass से होकर गुजरता है। कई स्थानों पर व्यापक शियरिंग और अत्यधिक क्रश्ड रॉक की स्थिति सामने आई।
इन जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों के चलते टनल में मोटे Mylonite Zones भी विकसित हुए। इनका प्रमुख कारण क्षेत्र का Main Boundary Thrust (MBT) के निकट स्थित होना बताया गया है।
ऐसे कठिन भूगर्भीय क्षेत्र में सुरक्षित तरीके से खुदाई पूरी करते हुए अंतिम ब्रेकथ्रू हासिल करना परियोजना की तकनीकी टीम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
टीमवर्क और तकनीकी दक्षता का परिणाम
एस्केप टनल-1 के सफल ब्रेकथ्रू को अधिकारियों, इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों, ठेकेदारों और श्रमिकों के निरंतर प्रयास, तकनीकी दक्षता, टीमवर्क और प्रतिबद्धता का परिणाम माना जा रहा है।
परियोजना में अब तक 41 ब्रेकथ्रू पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष पांच ब्रेकथ्रू अगले एक वर्ष के भीतर पूरा किए जाने की उम्मीद है।
हिमालय में आधुनिक रेल कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में आधुनिक रेल संपर्क स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। एस्केप टनल-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू परियोजना के निर्माण लक्ष्य की ओर बढ़ती प्रगति को दर्शाता है।
यह उपलब्धि न केवल एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग माइलस्टोन है, बल्कि हिमालय के चुनौतीपूर्ण भूभाग में सुरक्षित और आधुनिक रेल नेटवर्क विकसित करने की दिशा में भी एक अहम कदम है।
