जापान दौरे पर पीएम मोदी देश के लिए कितना अहम साबित होगा, ट्रम्प के लिए बड़ा संदेश है

मोदी के जापान दौरे की अहमियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जापान दौरा (29-30 अगस्त 2025) भारत-जापान संबंधों को नई मजबूती देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने के बीच हो रहा है, जो भारत-अमेरिका व्यापारिक तनाव को बढ़ा रहा है। ऐसे में जापान भारत के लिए एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहा है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकता है। यह मोदी का जापान का आठवां दौरा है, जो 2014 से भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के दसवें वर्ष को चिह्नित करता है। दौरे का मुख्य उद्देश्य 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करना और नई पहलों को लॉन्च करना है।

1. **आर्थिक सहयोग और निवेश का विस्तार**
– जापान ने दौरे के दौरान भारत में अगले दशक के लिए 10 ट्रिलियन येन (लगभग 68 अरब डॉलर) के निजी निवेश का लक्ष्य घोषित किया, जो 2022 के 5 ट्रिलियन येन के लक्ष्य से दोगुना है। यह निवेश हरित ऊर्जा, विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में होगा। जापानी कंपनियां पहले ही भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक निवेश कर चुकी हैं, जिसमें पिछले दो वर्षों में 13 अरब डॉलर शामिल हैं।
– पीएम मोदी ने टोक्यो में इंडिया-जापान इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा और जापानी कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य है। जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) ने भारत को सबसे ‘प्रमिसिंग’ निवेश स्थल बताया है, जबकि JETRO के अनुसार 80% जापानी कंपनियां भारत में विस्तार करना चाहती हैं।
– ट्रंप के टैरिफ के संदर्भ में, यह दौरा भारत को अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने में मदद करेगा। दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उदाहरण के लिए, सेंडाई में टोक्यो इलेक्ट्रॉन लिमिटेड के सेमीकंडक्टर प्लांट का दौरा किया गया, जो भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत करने का संकेत है।
– व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने के लिए प्रयास: वर्तमान में भारत का जापान के साथ व्यापार घाटा है, लेकिन दौरे में विविधीकरण और संतुलन पर चर्चा हुई। जापान ने भारत को ग्लोबल साउथ के लिए ‘स्प्रिंगबोर्ड’ बताया।

 

2. **रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी**
– दौरे का एक प्रमुख एजेंडा क्वाड (भारत, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) था, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मंच है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि क्वाड स्वास्थ्य सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग को बढ़ाएगा। भारत इस वर्ष क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, और ट्रंप के टैरिफ के बावजूद जापान के साथ मजबूत संबंध क्वाड की एकजुटता बनाए रखने में मदद करेंगे।
– रक्षा सहयोग: 2008 के संयुक्त घोषणापत्र को अपग्रेड करने पर चर्चा हुई, जिसमें मालाबार नौसैनिक अभ्यास, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष सहयोग शामिल है। दोनों देश हिंद-प्रशांत में नियम-आधारित व्यवस्था और स्वतंत्र नौवहन को सुनिश्चित करने पर सहमत हैं।
– क्षेत्रीय चुनौतियां: चीन की बढ़ती गतिविधियों (जैसे दक्षिण चीन सागर में तनाव) के बीच यह दौरा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करता है। जापान ने भारत को एक विश्वसनीय साझेदार बताया, जो SCO (शंघाई सहयोग संगठन) में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में मददगार साबित होगा।

 

3. **इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रौद्योगिकी में सहयोग**
– पीएम मोदी और जापानी पीएम शिगेरु इशिबा ने टोक्यो से सेंडाई तक बुलेट ट्रेन (शिंकानसेन) की सवारी की, जो मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के विस्तार का संकेत है। जापान E10 बुलेट ट्रेन (320 किमी/घंटा गति, भूकंप-प्रतिरोधी) के लिए समझौता कर सकता है, जो भविष्य में ड्राइवरलेस हो सकती है।
– अन्य परियोजनाएं: दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और मेट्रो रेल में जापानी निवेश बढ़ेगा। जापान ने लो-कार्बन टेक्नोलॉजी पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
– लोगों के बीच संपर्क: पीएम मोदी ने 16 जापानी प्रांतों के गवर्नरों से मुलाकात की और राज्य-प्रांत साझेदारी पहल को बढ़ावा दिया। सांस्कृतिक बंधन को मजबूत करने के लिए दारुमा डॉल (शुभकामना का प्रतीक) भेंट किया गया, जो भारत-जापान सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।

 

4. **वैश्विक संदर्भ में महत्व**
– यह दौरा SCO शिखर सम्मेलन (31 अगस्त-1 सितंबर, तियानजिन, चीन) से पहले हो रहा है, जहां पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलेंगे। जापान दौरा भारत को SCO में संतुलित भूमिका निभाने में मदद करेगा, जहां आतंकवाद (जैसे अप्रैल 2025 का पहलगाम हमला) और सीमा विवाद पर चर्चा होगी।
– ट्रंप टैरिफ का प्रभाव: अमेरिकी नीतियां भारत को जापान जैसे साझेदारों की ओर धकेल रही हैं। जापान खुद ट्रंप की टैरिफ का शिकार है, इसलिए दोनों देश साझा हितों पर एकजुट हो सकते हैं। यह भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ विदेश नीति को मजबूत करता है।
– सेंडाई में स्वागत: स्थानीय लोगों ने ‘मोदी सैन वेलकम’ के नारे लगाए, जो लोगों के बीच मजबूत बंधनों को दिखाता है।

कुल मिलाकर, यह दौरा भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति सशक्त करने में महत्वपूर्ण है। जापान के साथ साझेदारी न केवल द्विपक्षीय लाभ देगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक मजबूत नींव बनेगी।

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