‘संवाद से समाधान’: गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर छह राज्यों के बीच बनी ऐतिहासिक सहमति

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘संवाद से समाधान’ के विजन को चरितार्थ करते हुए केंद्र सरकार ने वर्षों से लंबित एक और बड़े राष्ट्रीय मसले को सुलझा लिया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ को लेकर संबंधित राज्यों के बीच ऐतिहासिक सहमति बन गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री की इस विशेष पहल पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी हो गए हैं। इस समझौते के बाद अब परियोजना को अंतिम अनुमोदन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (केंद्रीय कैबिनेट) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

बैठक में जुटे कई राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री

नई दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल मौजूद रहे। इसके अलावा परियोजना से सीधे जुड़े राज्यों के नेतृत्व के तौर पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय जल शक्ति सचिव, विद्युत मंत्रालय के सचिव सहित हिमाचल व उत्तराखंड के मुख्य सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) व संबंधित मंत्रालयों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।

वित्तीय भार का फॉर्मूला तय: 90% खर्च उठाएगी केंद्र सरकार

बैठक में किशाऊ परियोजना के निर्माण और वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक बड़ा फैसला किया गया। इसके तहत परियोजना के जल घटक (Water Component) के कुल कार्य का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। वहीं, शेष 10 प्रतिशत राशि का वित्तीय भार इस परियोजना से जुड़े सभी 06 राज्यों (हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी, हरियाणा और राजस्थान) द्वारा मिलकर उठाया जाएगा।

दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा अतिरिक्त पानी, ‘निर्मल यमुना’ का संकल्प होगा पूरा

इस बैठक में राज्यों के बीच जल और विद्युत वितरण को लेकर भी एक बेहद महत्वपूर्ण सहमति बनी। तय फॉर्मूले के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक (Power Component) के हिस्से की लागत को साझा करने के बदले में, हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर सहमति बन गई है।

यह निर्णय देश की राजधानी दिल्ली और मरुभूमि राजस्थान के लिए जलापूर्ति के लिहाज से गेम-चेंजर साबित होगा। इसके साथ ही, यह कदम स्वच्छ और निर्मल यमुना की दिशा में एक अहम पड़ाव सिद्ध होगा, क्योंकि इससे यमुना नदी में शुद्ध जल का निरंतर प्रवाह काफी बढ़ जाएगा।

क्या है किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना?

किशाऊ परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी (यमुना की प्रमुख सहायक नदी) पर प्रस्तावित एक बेहद महत्वाकांक्षी बांध परियोजना है। यह परियोजना सालों से राज्यों के आपसी समन्वय और वित्तीय मामलों के कारण लंबित चल रही थी। अब सहमति बनने से न सिर्फ इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जल विद्युत (हाइड्रो पावर) का उत्पादन होगा, बल्कि छह राज्यों को सिंचाई और पीने के पानी की किल्लत से बड़ी राहत मिलेगी।

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