सेतु आयोग का मुख्य फोकस: ‘पर्वतीय गांवों तक पहुंचे मजबूत स्वास्थ्य-शिक्षा, तभी रुकेगा पलायन’

देहरादून: अवस्थापना विकास सलाहकार सेतु आयोग (SETU Commission) के सलाहकार दिनेश अग्रवाल ने कहा है कि उत्तराखण्ड के वास्तविक और सतत विकास के लिए राज्य के प्रत्येक पर्वतीय गांव तक सुदृढ़ स्वास्थ्य एवं शिक्षा अवसंरचना तथा गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब गांवों में स्वास्थ्य और शिक्षा की बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी, तभी पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी, आजीविका के अवसर टिकाऊ बनेंगे और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘विकसित उत्तराखण्ड’ के संकल्प को वास्तविक अर्थों में साकार किया जा सकेगा।

5 प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है आयोग

दिनेश अग्रवाल ने बताया कि आयोग द्वारा नीतिगत सुधारों के प्रस्ताव तैयार करते समय जमीनी तथ्यों और वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत 5 प्रमुख क्षेत्रों पर कार्य किया जा रहा है:
  1. अर्थव्यवस्था एवं कौशल
  2. अवसंरचना एवं कल्याण
  3. शहरी एवं उप-शहरी विकास
  4. अनुश्रवण एवं मूल्यांकन
  5. डेटा एनालिटिक्स
उन्होंने कहा कि आयोग मुख्यमंत्री धामी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप राज्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया को साक्ष्य-आधारित एवं परिणाम-केंद्रित बना रहा है।

नीतिगत सुधार, कौशल विकास और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर

प्रेस वार्ता के दौरान आयोग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों का ब्योरा साझा किया गया:
  • नई नीतियां व कौशल विकास: राज्य में ‘उत्तराखण्ड बायोएनर्जी नीति-2026’, ‘वन पंचायत नियमावली-2026’ और ‘सहकारिता नीति-2026’ का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। NIIT फाउंडेशन के सहयोग से फ्यूचर स्किल्स और नैसकॉम (NASSCOM) के सहयोग से 119 राजकीय महाविद्यालयों में एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
  • स्मार्ट ग्राम केंद्र व ट्रॉमा केयर: 5 जिलों में 17 एकीकृत स्मार्ट ग्राम केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। एम्स ऋषिकेश के सहयोग से ट्रॉमा केयर एवं टेलीमेडिसिन व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
  • शहरी विकास व मूल्यांकन: नगरीय स्थानीय निकायों को अधिकारों के हस्तांतरण तथा नवीन शहरी अधिनियम के प्रारूप पर काम जारी है। इसके साथ ही पलायन रोकथाम योजना, अमृत सरोवर योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का विश्वविद्यालयों के सहयोग से मूल्यांकन शुरू किया गया है।
  • डिजिटल सुशासन (एक पहचान, अनेक समाधान): ‘डिजिटल इंडिया’ के तहत राज्य डेटा शासन नीति बनाई जा रही है, जो नागरिकों को बार-बार दस्तावेजी औपचारिकताओं से मुक्ति दिलाएगी।
इस अवसर पर नियोजन निदेशक मनोज पंत, विशेषज्ञ विशाल पराशर तथा हनुमंत रावत सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।