देहरादून/नई दिल्ली: पेपर लीक मामलों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण को लेकर केंद्र सरकार की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। केंद्रीय राज्य मंत्री (प्रधानमंत्री कार्यालय) डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए विशेष रूप से उत्तराखंड का उल्लेख किया और कहा कि राज्य में पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट (Special Fast Track Court) का गठन पहले ही किया जा चुका है।
समानांतर रूप से शुरू हुई फास्ट ट्रैक कोर्ट की प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफिया के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। इस बात का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि विधेयक प्रस्तुत होते ही माननीय विधि मंत्री ने समय की बर्बादी रोकने के उद्देश्य से स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए समानांतर रूप से अदालतों के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।
उत्तराखंड बना उदाहरण, अन्य राज्यों में भी प्रक्रिया जारी
केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि उत्तराखंड उन राज्यों में अग्रणी रहा है, जहाँ इन विशेष अदालतों का गठन पहले ही पूरा किया जा चुका है। उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, मध्य प्रदेश और बिहार में भी स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की गई हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों एवं प्रमुख स्थानों पर भी ऐसी अदालतों की स्थापना की जाएगी।
उत्तराखंड के युवाओं को मिलेगा त्वरित न्याय
उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और नकल माफिया पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार लगातार कड़े कदम उठा रही है। ऐसे में केंद्र स्तर पर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के क्रियान्वयन में उत्तराखंड के अग्रणी रहने से अब राज्य के अभ्यर्थियों और युवाओं को भर्ती संबंधी मुकदमों में वर्षों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सकेगी।
