देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के विकास, कर्मचारियों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई है। नशे के खिलाफ अभियान से लेकर श्रमिकों के मानदेय तक, सरकार ने कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
1. ‘ड्रग फ्री देवभूमि’ के लिए बनेगा स्वतंत्र ढांचा
नशे के खिलाफ मुख्यमंत्री के ‘ड्रग फ्री देवभूमि 2025’ के संकल्प को पूरा करने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को अब अपना अलग और स्थाई ढांचा मिलेगा।
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पदों का सृजन: राज्य मुख्यालय में पहली बार 22 नए पदों को मंजूरी दी गई है।
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टीम का स्वरूप: इसमें 1 डीएसपी, 2 ड्रग इंस्पेक्टर, 1 इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 12 आरक्षी/मुख्य आरक्षी समेत कुल 22 पद शामिल होंगे।
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महत्व: अब तक यह टास्क फोर्स पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर चल रही थी, लेकिन अब स्वतंत्र कैडर होने से नशे के सौदागरों पर नकेल कसना और आसान होगा।
2. वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को बड़ी सौगात
लंबे समय से न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे वन विभाग के दैनिक श्रमिकों के लिए कैबिनेट ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
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वेतन वृद्धि: 589 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को अब न्यूनतम 18,000 रुपये मासिक वेतन मिलेगा।
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लाभार्थी: वन विभाग और वन विकास निगम में कार्यरत कुल 893 श्रमिकों में से अब सभी को न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिल सकेगा (304 को पहले से ही यह लाभ मिल रहा था)।
3. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: ईएसआई (ESI) का नया ढांचा
राज्य सरकार ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESI) के अंतर्गत चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए “उत्तराखण्ड श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित किया है।
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विस्तार: ईएसआई ढांचे में पदों की संख्या 14 से बढ़ाकर 94 कर दी गई है।
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नए पद: इसमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, 6 संयुक्त निदेशक और 1 अपर निदेशक का पद सृजित किया गया है। इससे कामगारों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं में व्यापक सुधार होगा।
4. सूक्ष्म खाद्य उद्यमों को मिला एक साल का विस्तार
केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार ने भी मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि को एक वर्ष के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026तक कर दिया है।
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भविष्य में यदि भारत सरकार इस योजना की अवधि और बढ़ाती है, तो राज्य में भी यह स्वतः विस्तारित मानी जाएगी। इससे छोटे खाद्य उद्योगों को आर्थिक संबल मिलेगा।
5. कारागार सुधार और ‘आदतन अपराधी’ की नई परिभाषा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए मंत्रिमंडल ने उत्तराखण्ड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है।
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इसके तहत “आदतन अपराधी (Habitual offenders)” की परिभाषा को राज्य के कानूनों के अनुरूप स्पष्ट किया जाएगा। इस संशोधन विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
6. बोनस संशोधन विधेयक (2020) की वापसी
कोविड-19 के दौरान उद्योगों को राहत देने के लिए लाए गए बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 को सरकार ने वापस लेने का निर्णय लिया है।
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केंद्र सरकार की असहमति और वर्तमान में कोविड जैसी परिस्थितियां न होने के कारण इस विधेयक को विधानसभा से वापस लिया जाएगा। अब कर्मचारियों को बोनस के पुराने मानकों के अनुसार ही भुगतान सुनिश्चित होगा।
