उत्तराखंड शहरी परिवहन क्रांति: मेट्रो, ई-बीआरटी और रोपवे का रोडमैप

देहरादून और राज्य के अन्य पर्यटन केंद्रों में बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर फोकस किया है। बैठक के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित रहे:

1. देहरादून में ई-बीआरटी (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम)

राजधानी देहरादून में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए दो प्रमुख कॉरिडोर पर ई-बीआरटी परियोजना को सैद्धांतिक सहमति मिल गई है।

  • विशेषता: यह एक पर्यावरण-अनुकूल मास रैपिड ट्रांजिट प्रणाली होगी।

  • अगला कदम: इसके अध्ययन के निर्देश दे दिए गए हैं, जिसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

2. धार्मिक पर्यटन के लिए रोपवे का जाल

श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए रोपवे परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है:

  • हर की पैड़ी (हरिद्वार): इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना को बोर्ड से अनुमोदन मिल गया है। जल्द ही इसे सक्षम प्राधिकरण को भेजा जाएगा।

  • ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव: त्रिवेणी घाट से नीलकंठ तक प्रस्तावित रोपवे को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है। फॉरेस्ट क्लियरेंस के पहले चरण के बाद इसके टेंडर जारी किए जाएंगे।

  • कैंची धाम और मसूरी: नैनीताल, मसूरी और प्रसिद्ध कैंची धाम के लिए संभाव्यता अध्ययन (Feasibility Study) कराया जा रहा है।

3. भविष्य की तैयारी: सेकेंड ऑर्डर मास ट्रांजिट सिस्टम

आवास सचिव ने निर्देश दिए कि केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए दीर्घकालिक परिवहन योजना तैयार की जाए। देहरादून में मुख्य परिवहन प्रणालियों के साथ-साथ ‘सेकेंड ऑर्डर मास ट्रांजिट सिस्टम’ की संभावनाओं पर भी काम शुरू कर दिया गया है।

समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु एक नजर में:

परियोजना वर्तमान स्थिति आगामी लक्ष्य
ई-बीआरटी (देहरादून) बोर्ड की सैद्धांतिक सहमति विस्तृत अध्ययन एवं कैबिनेट अनुमोदन
नीलकंठ रोपवे वन्यजीव बोर्ड से अनुमति प्राप्त फॉरेस्ट क्लियरेंस के बाद टेंडर प्रक्रिया
हर की पैड़ी रोपवे बोर्ड द्वारा अनुमोदित प्राधिकरण को प्रस्ताव प्रस्तुतीकरण
मसूरी/कैंची धाम रोपवे संभाव्यता अध्ययन जारी व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करना

डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि समयबद्ध तरीके से इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारना सरकार की प्राथमिकता है। इन प्रयासों से न केवल स्थानीय निवासियों को जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ ‘पर्यटन’ को भी नए पंख लगेंगे।