कांग्रेस ने 60 सालों तक आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़े रखा: प्रधानमंत्री मोदी

नर्मदा:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में ‘जनजातीय गौरव दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपने आदिवासी समुदायों के योगदान को कभी नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिए था, लेकिन केवल कुछ परिवारों को श्रेय देने की चाहत ने हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों के त्याग, अनुशासन और समर्पण की उपेक्षा की।

यही कारण है कि 2014 से पहले देश में शायद ही किसी ने भगवान बिरसा मुंडा को सम्मान दिया हो। हमने इसे बदला क्योंकि आने वाली पीढ़ियों को यह जानना जरूरी है कि हमारे आदिवासी समुदायों ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 के पहले भगवान बिरसा मुंडा को कोई याद करने वाला नहीं था। सिर्फ उनके अगल-बगल के गांव तक ही पूछा जाता था। आज देशभर में कई ट्राइबल म्यूजियम बनाए जा रहे हैं।

आज जनजातीय गौरव दिवस हमें उस अन्याय को भी याद करने का अवसर देता है, जो हमारे करोड़ों आदिवासी भाई-बहनों के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में छह दशक तक राज करने वाली कांग्रेस ने आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। छह दशकों तक, कांग्रेस सरकारों ने आदिवासी समुदायों को उनके हाल पर छोड़ दिया। कुपोषण कायम रहा, शिक्षा का अभाव रहा, और ये कमियां कई आदिवासी क्षेत्रों की दुर्भाग्यपूर्ण पहचान बन गईं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारें उदासीन रहीं। भाजपा के लिए, आदिवासी कल्याण हमेशा प्राथमिकता रहा है। हम अपने आदिवासी भाइयों और बहनों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने के दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़े हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज देश की राष्ट्रपति एक आदिवासी महिला है। भाजपा और एनडीए ने हमेशा आदिवासी समाज के हमारे होनहार साथियों को शीर्ष पदों पर पहुंचाने का प्रयास किया है। आज छत्तीसगढ़ और ओडिशा सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री हमारे जनजातीय समाज के हैं।

आज, हमारे आदिवासी समुदाय के खिलाड़ी हर बड़ी प्रतियोगिता में चमक रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में, भारत की महिला क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया और उस जीत में हमारे आदिवासी समाज की बेटी की उल्लेखनीय भूमिका रही। जब पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, तब देश में पहली बार जनजातीय समाज के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया गया। लेकिन फिर जब कांग्रेस की सरकार बनी, तो उन्होंने इस मंत्रालय की उपेक्षा की, और इसे पूरी तरह भुला दिया गया।

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