राष्ट्र निर्माण में जन-सहभागिता का आह्वान: मुख्यमंत्री धामी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए दिए 7 संकल्प

देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि बताते हुए प्रदेशवासियों से ऊर्जा संसाधनों की बचत और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का पुरजोर आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अपील केवल आर्थिक बचत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

देश की अर्थव्यवस्था में व्यक्तिगत योगदान का महत्व

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यदि नागरिक अपनी दैनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव और संकल्प लें, तो यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा आधार बन सकता है। उन्होंने नागरिकों से निम्नलिखित 7 प्रमुख संकल्पों पर ध्यान केंद्रित करने का अनुरोध किया:

  1. स्वदेशी को प्राथमिकता: अनावश्यक विदेश यात्राओं को टालना और स्थानीय (Local) उत्पादों को बढ़ावा देना।

  2. ईंधन की बचत: पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का अधिक उपयोग करना।

  3. ऊर्जा संरक्षण: बिजली और अन्य ऊर्जा संसाधनों की बर्बादी को रोकना।

  4. आर्थिक संयम: कम से कम एक वर्ष के लिए स्वर्ण आभूषणों की खरीद से बचना।

  5. प्राकृतिक खेती: कृषि में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर प्राकृतिक खाद (Organic Fertilizer) का उपयोग करना।

  6. खाद्य तेल का सीमित उपयोग: देश के आयात बोझ को कम करने के लिए खाद्य तेल का संयमित उपयोग करना।

  7. वोकल फॉर लोकल: स्थानीय कारीगरों और उद्योगों को मजबूती प्रदान करना।

‘वोकल फॉर लोकल’ बनेगा जन-आंदोलन

मुख्यमंत्री ने देवभूमि के नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड के लोग हमेशा राष्ट्र हित के कार्यों में अग्रणी रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य की जनता प्रधानमंत्री जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान को एक जन-आंदोलन का रूप देगी। उन्होंने कहा कि “वोकल फॉर लोकल” का संकल्प तभी सफल होगा जब समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझेगा।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम

संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा, तकनीक और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। नागरिकों की सक्रिय सहभागिता इस संकल्प को और अधिक ऊर्जा प्रदान करेगी। उन्होंने अपील की कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आज से ही संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लें।

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