हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव हैं।
प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ने को मुख्यमंत्री ने ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच सेतु
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे गांव की स्थानीय समस्याओं को सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ पहुंचाना पंचायत प्रतिनिधियों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
विकास योजनाओं में स्थानीय जरूरतों को मिले प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को संसाधन, आधुनिक तकनीक और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 2026 से शुरू जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इन योजनाओं में स्थानीय जरूरतों, ग्रामीणों के सुझाव और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत को अपने विकास कार्यों के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम तय करने चाहिए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके।
पेयजल, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत की विकास योजना में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
ग्राम सभाओं में स्थानीय लोगों के सुझाव लिए जाएं और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा हो। साथ ही कमजोर और वंचित वर्गों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
पंचायतों को मिल रही डिजिटल मजबूती
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं।
पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 भवनों की मरम्मत की गई है। वहीं एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी किया जा चुका है।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति और विकास कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और इसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की संख्या से ज्यादा उनका वास्तविक प्रभाव महत्वपूर्ण है।
स्वच्छ और आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्वच्छ और स्वस्थ गांवों के निर्माण में पंचायतों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों और स्थानीय बाजारों की सफाई के लिए कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। विकासखंड स्तर पर भी इस दिशा में विशेष मशीनों की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने और गांवों में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
महिला उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा पलायन को कम करना है। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सहित कई कदम उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ गांवों की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है।
गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों से प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का उपयोग करते हुए पंचायतों को स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि पंचायत प्रतिनिधियों के सक्रिय प्रयासों से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और विकसित उत्तराखंड के संकल्प को साकार करने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
