‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’: उत्तराखंड में जनसेवा शिविरों की धूम; 2300 से अधिक लाभार्थियों को मिला योजनाओं का लाभ

देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के पांच वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में जनसेवा का महाअभियान जारी है। इसी कड़ी में ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ तथा ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के अंतर्गत गुरुवार को उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में बहुउद्देशीय जनसेवा शिविरों, जनसमस्या निवारण शिविरों और जनजागरूकता कार्यक्रमों का व्यापक स्तर पर आयोजन किया गया।

इन शिविरों के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे गांव-गांव पहुंचकर आम जनता से रू-ब-रू हुआ। मौके पर ही नागरिकों को विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया गया और जनसमस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया गया। पूरे प्रदेश में 2,366 से अधिक लाभार्थियों को इन शिविरों के माध्यम से लाभान्वित किया गया, जबकि प्राप्त 389 से अधिक शिकायतों में से 257 से अधिक का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया।

जनपदवार प्रदर्शन: एक नजर में (मुख्य आंकड़े)

विभिन्न जनपदों में आयोजित शिविरों में शिकायतों के निस्तारण और लाभार्थियों की स्थिति को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

जनपद / क्षेत्र लाभार्थी संख्या कुल शिकायतें / आवेदन मौके पर निस्तारण मुख्य गतिविधियां व विशेष वितरण
कोटाबाग (नैनीताल) 510 250 190 16 लाभार्थियों को ₹13 लाख के स्वरोजगार चेक व महालक्ष्मी किट वितरण
रेगड़ू (चम्पावत) 359 51 विभिन्न विभागीय योजनाओं का सीधा लाभ हस्तांतरण
पुरोला (उत्तरकाशी) 290 5 5 प्राप्त सभी शिकायतों का मौके पर 100% निस्तारण
नारसन (हरिद्वार) 264 (सहभागी) 11 6 विभिन्न विकास योजनाओं की ऑन-द-स्पॉट जानकारी
दशोली (चमोली) 174 26 18 जनसमस्याओं का तत्काल गुणात्मक समाधान
थलीसैंण (पौड़ी गढ़वाल) 169 विभिन्न विभागीय सेवाओं एवं योजनाओं का सीधा लाभ
जसपुर (ऊधम सिंह नगर) 54 38 स्वास्थ्य, महिला-बाल विकास एवं पशुपालन सेवाएं
ग्वालदम (चमोली) 42 अधिकांश अधिकांश शिकायतों का मौके पर ही त्वरित समाधान
प्रतापनगर (टिहरी) महिला, युवा एवं सैनिक कल्याण पर आधारित विशेष कार्यक्रम

एक ही छत के नीचे मिलीं तमाम नागरिक सेवाएं: मुख्य आकर्षण

  • मल्टी-डिपार्टमेंटल स्टॉल्स: शिविरों में स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, पशुपालन, उद्योग, स्वरोजगार, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, ग्राम्य विकास, पंचायतीराज, राजस्व, शिक्षा, श्रम, सेवायोजन, आयुष, विद्युत और पेयजल समेत तमाम विभागों ने अपनी प्रदर्शनियां और स्टॉल लगाए।

  • ऑन-द-स्पॉट स्वास्थ्य और सहायता: शिविरों में आए ग्रामीणों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, मुफ्त दवा वितरण, आवश्यक प्रमाण-पत्र जारी करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन की औपचारिकताएं पूरी करने और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के आवेदनों को मौके पर ही मंजूरी देने जैसी महत्वपूर्ण कार्रवाइयां की गईं।

  • सौगात और प्रोत्साहन: नैनीताल के कोटाबाग में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 16 युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए लगभग ₹13 लाख के चेक सौंपे गए। इसके साथ ही नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पात्र महिलाओं को महालक्ष्मी किट का भी वितरण किया गया।

अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचेगा विकास का लाभ: सीएम धामी

अभियान की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

मुख्यमंत्री का संदेश:

“‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ ही हमारी राज्य सरकार की कार्यसंस्कृति का मुख्य आधार है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से शासन और प्रशासन को सीधे जनता की चौखट पर पहुंचाया जा रहा है, ताकि दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को छोटे-छोटे कामों के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। हमारी सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड के विकास और जनकल्याण का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे।”

पारदर्शिता और समयबद्धता के सख्त निर्देश

प्रदेशभर में आयोजित इन शिविरों में स्थानीय सांसदों, विधायकों, राज्य मंत्रियों, विभिन्न आयोगों एवं परिषदों के अध्यक्षों सहित जिलाधिकारियों (DMs) और मुख्य विकास अधिकारियों (CDOs) ने व्यक्तिगत रूप से प्रतिभाग किया। वीआईपी और वरिष्ठ अधिकारियों ने विभागीय स्टॉलों का बारीकी से निरीक्षण किया।

मौके पर मौजूद अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए कि शेष बची सभी शिकायतों को संबंधित विभागों को भेजकर एक तय समयसीमा (Timeframe) के भीतर गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी तरीके से हल किया जाए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी ढिलाई के कारण कोई भी पात्र नागरिक सरकार की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहने पाए।

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