उत्तराखंड सरकार का ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ का नारा केवल विज्ञापनों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर भी यह सुशासन और संवेदनशीलता की नई इबारत लिख रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हाल ही में सहसपुर में आयोजित सेवा, सुशासन एवं समर्पण ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ बहुउद्देशीय शिविर में देखने को मिला। यहाँ मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के एक त्वरित फैसले ने न केवल एक असहाय महिला के सपनों को पंख दिए, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो फाइलों का सफर मिनटों में तय हो सकता है।
बहुउद्देशीय शिविर में उमड़ी जनता, सीएम ने खुद सुनीं समस्याएं
सहसपुर में आयोजित इस विशाल बहुउद्देशीय शिविर का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज के क्षेत्रों से आए ग्रामीणों की समस्याओं का एक ही छत के नीचे निस्तारण करना था। शिविर में सुबह से ही अपनी फरियाद लेकर सैकड़ों लोग पहुंचे थे। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद मंच पर बैठकर एक-एक कर लोगों की समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देश दिए कि जनता की समस्याओं को लटकाया न जाए, बल्कि उनका त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण (Time-bound Resolution) सुनिश्चित किया जाए।
बबली गुप्ता का ज्ञापन और मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता
इसी शिविर के दौरान सहसपुर की ही स्थानीय निवासी श्रीमती बबली गुप्ता मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं और उन्हें अपना एक लिखित ज्ञापन सौंपा। बबली गुप्ता ने मुख्यमंत्री को अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि वे आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं और जूट बैग (Eco-friendly Jute Bags) बनाने का लघु उद्योग शुरू कर अपनी आजीविका चलाना चाहती हैं। लेकिन उनके पास इस काम को शुरू करने के लिए सबसे बुनियादी जरूरत, यानी एक सिलाई मशीन खरीदने के पैसे नहीं हैं। उन्होंने भावुक मन से मुख्यमंत्री से सहायता की गुहार लगाई।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने महिला की स्वरोजगार की ललक को देखते हुए मामले का तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए अधिकारियों को तलब किया और निर्देश दिए कि महिला की मांग को सरकारी प्रक्रियाओं के फेर में न उलझाया जाए और उन्हें तुरंत सिलाई मशीन की व्यवस्था कराई जाए।
मुख्यमंत्री सचिवालय का समन्वय: शाम होते ही मिला तोहफा
मुख्यमंत्री के इस कड़े और संवेदनशील निर्देश का असर यह हुआ कि पूरा प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ गया। मुख्यमंत्री के अपर सचिव, श्री बंशीधर तिवारी ने खुद इस पूरे मामले का समन्वय (Coordination) संभाला। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को सक्रिय किया और सिलाई मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई।
प्रशासनिक मुस्तैदी का आलम यह था कि जिस ज्ञापन पर आमतौर पर महीनों लग जाते हैं, उस पर कुछ ही घंटों के भीतर कार्रवाई पूरी हो गई। शिविर समाप्त होने और शाम ढलने से पहले ही अधिकारी श्रीमती बबली गुप्ता के घर पहुंचे और उन्हें नई सिलाई मशीन सौंप दी।
स्वरोजगार की ओर बढ़े कदम, बबली ने जताया आभार
अचानक और इतनी तेजी से मिली इस सरकारी मदद को देखकर श्रीमती बबली गुप्ता की आँखें खुशी से छलक आईं। सिलाई मशीन प्राप्त होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार का सहृदय आभार व्यक्त किया। बबली ने कहा, “मैंने सोचा था कि ज्ञापन देने के बाद दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे, लेकिन हमारी सरकार ने तो चमत्कार कर दिया। शाम तक सिलाई मशीन मेरे हाथ में होगी, ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। अब मैं बिना किसी देरी के जूट बैग का निर्माण शुरू कर सकूंगी और अपने परिवार को एक बेहतर आर्थिक भविष्य दे सकूंगी।”
निष्कर्ष: महिला सशक्तिकरण और सुशासन का मॉडल
यह घटना महज एक सिलाई मशीन बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) और ‘अंत्योदय’ के संकल्प को दर्शाती है। प्लास्टिक के खिलाफ जूट बैग बनाने की बबली गुप्ता की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है। सहसपुर का यह शिविर यह संदेश देने में पूरी तरह सफल रहा कि पुष्कर सिंह धामी की सरकार आम आदमी की छोटी से छोटी जरूरत के प्रति सजग और जवाबदेह है।
