ऑनमार्क पोर्टल की सुरक्षा में जुटा सीबीएसई; मूल्यांकन प्रणाली पर विवाद के बीच साइबर सुरक्षा टीमें सिस्टम को कर रहीं मजबूत

नई दिल्ली, 31 मई। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल होने वाले अपने ‘ऑनमार्क पोर्टल’ की तकनीकी खामियों को दूर करने और सुरक्षा को पुख्ता करने की कवायद तेज कर दी है। बोर्ड ने रविवार को आधिकारिक तौर पर कहा कि वह पोर्टल की कमजोरियों पर लगातार नजर रख रहा है और सरकारी एजेंसियों सहित आईआईटी (IIT) के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से इस पूरे डिजिटल सिस्टम को मजबूत बनाने में जुटा है।

ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पर उठ रहे सवाल

सीबीएसई का यह कदम 12वीं कक्षा के मूल्यांकन के लिए नए-नए लागू किए गए ‘ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम’ पर बढ़ती जांच और आलोचनाओं के बाद आया है। हाल ही में इस असेसमेंट प्रोसेस में कई तकनीकी गड़बड़ियों और विसंगतियों की बातें सामने आई थीं। विवाद तब और गहरा गया जब बड़ी संख्या में छात्रों ने अपने परीक्षा परिणामों (स्कोर) में अचानक भारी उतार-चढ़ाव देखने के बाद बोर्ड से अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं (आंसर शीट) की कॉपियां मांगीं।

आंतरिक समीक्षा में पायलट प्रोजेक्ट न चलाने का खुलासा

इंटरनल रिव्यू के दौरान यह चौकाने वाली जानकारी सामने आई है कि सीबीएसई ने देश भर में किसी बड़े पैमाने पर व्यापक पायलट प्रोजेक्ट या ट्रायल रन चलाए बिना ही इस डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम को सीधे लागू कर दिया था। बाद में की गई जांचों से पता चला कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान आई तकनीकी दिक्कतों के कारण एक बहुत बड़े हिस्से को ‘एक्स्ट्रा प्रोसेसिंग’ यानी अतिरिक्त जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। आंकड़ों के अनुसार, इमेज-क्वालिटी और तकनीकी कमियों के चलते 68,000 से ज्यादा आंसर शीट को दोबारा स्कैन करना पड़ा, जबकि लगभग 13,500 कॉपियों का मैनुअल वेरिफिकेशन (हाथ से मिलान) करना पड़ा।

साइबर विशेषज्ञों की तैनाती और सतर्क नागरिकों का आभार

बढ़ते विवाद के बीच बोर्ड ने बयान जारी कर कहा, “हम अपने सर्विस प्रोवाइडर के ऑनmark पोर्टल की उन कमजोरियों पर करीब से नजर रख रहे हैं जिन्हें पब्लिक डोमेन में फ्लैग किया गया है।” बोर्ड ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में देश के शीर्ष साइबर सुरक्षा प्रोफेशनल्स की एक टीम को इस इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक सुरक्षित सेट-अप पर स्थानांतरित करने के काम में लगाया गया है। पहचानी गई कई कमजोरियों को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है। इसके साथ ही बोर्ड ने तकनीकी कमियां उजागर करने के लिए सतर्क नागरिकों और एथिकल हैकर्स का आभार जताया और आगे भी किसी इनपुट के लिए सीबीएसई की सिक्योरिटी टीम से संपर्क करने की अपील की।

डेटा लीक और हैकिंग के आरोपों को बोर्ड ने किया खारिज

विभिन्न आलोचनाओं और आशंकाओं के बावजूद सीबीएसई ने उन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें परीक्षा डेटा के ब्रीच होने या सिस्टम के हैक होने की बात कही जा रही थी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि एक साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर द्वारा जिस वेब लिंक (URL) को लेकर सवाल उठाए गए थे, वह दरअसल केवल सैंपल जानकारी वाला एक ‘टेस्टिंग एनवायरनमेंट’ (टेस्ट प्लेटफॉर्म) था। इसका वास्तविक परीक्षा मूल्यांकन या छात्रों के गोपनीय डेटा वाले लाइव ऑपरेशनल पोर्टल से कोई सीधा संबंध नहीं था।

पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने की कोशिशें तेज

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों के बीच नई डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था की क्रेडिबिलिटी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। सीबीएसई के आला अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि इस डिजिटल मैकेनिज्म की विश्वसनीयता को बेहतर बनाने, साइबर सुरक्षा घेरे को अभेद्य करने और मूल्यांकन प्रक्रिया की शुचिता व पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं।

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