देहरादून, 11 दिसंबर 2025
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में घनसाली स्वास्थ्य जन संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। लंबे समय से चल रहे आंदोलन और हड़ताल के बाद मुख्यमंत्री के सकारात्मक आश्वासन एवं ठोस निर्णय के बाद प्रतिनिधिमंडल ने अपनी हड़ताल स्थगित कर दी।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि टिहरी गढ़वाल जिले के दूरस्थ पिलखी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। **प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी (Type-B) को 30 शैय्या युक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के रूप में उच्चीकृत कर दिया गया है**। इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।
इस उच्चीकरण के साथ ही सरकार ने कुल
36 नए पदों (26 नियमित + 10 आउटसोर्स)** का सृजन किया है, जो अस्थायी रूप से 28 फरवरी 2026 तक स्वीकृत हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर इन्हें आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इन पदों के सृजन से स्वास्थ्य केंद्र का संचालन सुचारु रूप से हो सकेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा,
> “हमारा लक्ष्य है कि पर्वतीय क्षेत्रों में भी मैदानी क्षेत्रों के समान उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। पिलखी में 30 बेड CHC की स्वीकृति से हजारों लोगों की लंबी प्रतीक्षा समाप्त होगी। हम ‘हर घर स्वास्थ्य, हर व्यक्ति स्वस्थ’ के संकल्प को साकार करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। घनसाली क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और पिलखी स्वास्थ्य केंद्र को चरणबद्ध तरीके से और उन्नत किया जाएगा। आवश्यक पदों की तैनाती, भवन सुधार एवं अन्य चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय क्षेत्र की जनता के लिए ऐतिहासिक है।
मुलाकात में उपस्थित रहे:
श्री संजीव आर्य, श्री विक्रम कपाल, श्री अनुग्रह लाल शाह, श्री गोविन्द दिगारी, श्रीमती सुनीता पवार, श्रीमती कमला पंवार, श्री अनुग्रह कपाल एवं श्री अंकित नौडियाल (घनसाली स्वास्थ्य जन संघर्ष मोर्चा)।
इस निर्णय से पिलखी सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को अब निकटतम स्थान पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे गंभीर मरीजों को लंबी दूरी तय कर टिहरी या ऋषिकेश जाना पड़ेगा।
