मुख्य सचिव का सख्त रुख: “सार्वजनिक धन की मितव्ययिता सर्वोपरि”, विकास कार्यों के लिए ₹3800 लाख से अधिक की योजनाओं को दी मंजूरी

देहरादून | 25 फरवरी, 2026

उत्तराखण्ड के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनसुविधाओं के विस्तार की दिशा में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में ‘अधिकृत वित्त समिति’ की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क सुदृढ़ीकरण, पेयजल और पुल निर्माण से जुड़े करोड़ों रुपये के प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई, लेकिन साथ ही मुख्य सचिव ने फिजूलखर्ची और ढिलाई बरतने वाले विभागों को कड़ी फटकार भी लगाई।

प्रमुख स्वीकृतियां: सड़कों का चौड़ीकरण और नए पुल

बैठक में देहरादून और पिथौरागढ़ की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई:

  • देहरादून स्मार्ट कनेक्टिविटी: न्यू कैंट मार्ग (दिलाराम बाजार से विजय कॉलोनी पुल तक) को 2-लेन से 3-लेन में अपग्रेड किया जाएगा। इसके तहत विद्युत लाइनों को आधुनिक ‘यूटिलिटी डक्ट’ में स्थानांतरित करने और वाटर सप्लाई लाइन शिफ्टिंग हेतु ₹1257.96 लाखस्वीकृत किए गए।

  • पिथौरागढ़ पेयजल सुधार: घाट पंपिंग पेयजल योजना की जर्जर पाइपलाइनों और राइजिंग मेन के प्रतिस्थापन हेतु ₹1338.53 लाख की योजना को अनुमोदित किया गया, जिससे सीमांत जनपद में पानी की किल्लत दूर होगी।

  • मसूरी हाईवे पर नया पुल: सहसपुर के पास क्षतिग्रस्त एकल लेन पुल के स्थान पर ₹1200.17 लाख की लागत से 60 मीटर स्पान का अत्याधुनिक ‘स्टील बॉक्स पुल’ (दो लेन) बनाया जाएगा।

रामनगर बस टर्मिनल विवाद: जांच कमेटी गठित

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने रामनगर बस टर्मिनल निर्माण कार्य के संशोधित बजट (Revised Estimate) पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। परियोजना की कुल लागत के मुकाबले फाउंडेशन (नींव) और साइट विकास पर अत्यधिक खर्च दिखाए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए।

  • कड़ी कार्रवाई: उन्होंने PWD और पेयजल निगम को निर्देश दिए कि एक विशेष कमेटी गठित कर प्रारंभिक लागत, साइट चयन और खर्च की व्यवहारिकता की गहन जांच की जाए।

विभागों को चेतावनी: “कंसलटेंट के भरोसे न रहें”

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन का उपयोग पूरी जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा:

  1. विभाग केवल बाहरी कंसलटेंट (Consultant) के प्रस्तावों पर आंख मूंदकर निर्भर न रहें।

  2. किसी भी फाइल को आगे बढ़ाने से पहले विभाग स्वयं उसकी पर्याप्त स्क्रूटनी (जांच) करें।

  3. मितव्ययिता, प्रासंगिकता और उपयोगिता ही किसी भी प्रोजेक्ट की स्वीकृति का आधार होनी चाहिए।

बैठक में सचिव श्री पंकज पांडेय, एस.ए.अद्दांकी, श्री बृजेश संत सहित विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।