नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भारत ने देश से भागने वाले भगोड़ों के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई छेड़ दी है। वर्ष 2019 से 2026 (जुलाई तक) के दौरान 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। PIB द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने एकीकृत, खुफिया-आधारित और तकनीक-संचालित मॉडल अपनाकर भगोड़ों के प्रत्यर्पण को ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ बनाया है।
2014 से पहले बनाम मोदी सरकार का ‘मिशन मोड’
2014 से पहले प्रत्यर्पण कानून कालबाह्य थे और केवल 37 देशों के साथ संधियां थीं। 2004 से 2013 के बीच प्रतिवर्ष औसतन केवल 4 भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था और 110 अनुरोध लंबित पड़े रहते थे।
मोदी सरकार ने इस रुख को बदलते हुए इसे तीन मुख्य स्तंभों पर आगे बढ़ाया:
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वैश्विक संचालन (Global Operations)
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मजबूत आंतरिक समन्वय (Strong Coordination)
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स्मार्ट कूटनीति (Smart Diplomacy)
कड़े कानून और ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’
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कानूनी सुधार: 2019 में NIA और UAPA संशोधन अधिनियम लागू किए गए। 2024 में नए आपराधिक कानून लागू होने के साथ BNSS की धारा 355 और 356 के तहत ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ (Trial in Absentia) का प्रावधान किया गया, जिससे भगौड़े की अनुपस्थिति में भी उस पर मुकदमा चलाकर सजा सुनाई जा सकती है।
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संपत्ति जब्ती: PMLA के सख्त क्रियान्वयन से 2019 से 2026 के बीच ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई और आर्थिक अपराधियों से ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी (Restitution) कराई गई।
‘भारतपोल’, ऑपरेशन त्रिशूल और रेड कॉर्नर नोटिस
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BHARTPOL: जनवरी 2025 में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च किए गए ‘भारतपोल’ पोर्टल ने 1,400 से अधिक केंद्रीय व राज्य स्तरीय एजेंसियों को सीबीआई और इंटरपोल से जोड़ा। इससे सूचना साझा करने का समय घटकर मात्र 3 से 10 दिन रह गया।
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ऑपरेशन त्रिशूल: विदेशों में पहचान बदलकर छिपे अपराधियों को ट्रैस करने के लिए सैटेलाइट, डिजिटल फुटप्रिंट्स और प्रोफाइल-मैपिंग का इस्तेमाल किया गया।
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रेड कॉर्नर नोटिस: पिछले 3 वर्षों में 401 और 2026 (अब तक) में रिकॉर्ड 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए।
📊 वापस लाए गए अपराधियों का वर्षवार ब्योरा (2019-2026):
| अपराध श्रेणी | 2019 | 2020 | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 (जुलाई तक) | कुल |
| हत्या / डकैती / हिंसक अपराध | 06 | 06 | 03 | 11 | 07 | 11 | 09 | 09 | 62 |
| यौन अपराध / पॉक्सो (POCSO) | 02 | 00 | 04 | 13 | 04 | 15 | 13 | 02 | 53 |
| संगठित अपराध / गैंगस्टर | 01 | 01 | 00 | 04 | 03 | 05 | 14 | 14 | 42 |
| आतंकवादी गतिविधियां | 00 | 00 | 01 | 04 | 02 | 04 | 05 | 01 | 17 |
| मानव तस्करी / अपहरण | 00 | 00 | 01 | 01 | 04 | 01 | 08 | 03 | 18 |
| ड्रग्स व अन्य अपराध | 00 | 00 | 14 | 07 | 17 | 07 | 21 | 16 | 82 |
| कुल योग | 09 | 07 | 23 | 40 | 37 | 43 | 70 | 45 | 274 |
संस्थागत सुधार: ‘स्टैंडिंग फोकस ग्रुप’
जनवरी 2026 में IB के मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत ‘स्टैंडिंग फोकस ग्रुप’ का गठन किया गया, जो प्रत्यर्पण से जुड़े मामलों की निरंतर निगरानी, डोजियर के मानकीकरण और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ रियल-टाइम फॉलो-अप का काम कर रहा है। अमेरिका से तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण भारत की इसी दीर्घकालिक लीगल और डिप्लोमैटिक रणनीति की बड़ी सफलता का प्रतीक है।
