जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार: मुख्यमंत्री धामी ने पेश किया सुशासन का ऐतिहासिक मॉडल

उत्तराखंड समाचार | 26 दिसंबर, 2025 | देहरादून

अब जनता नहीं जाएगी दफ्तर, सरकार पहुँचेगी घर-घर: सीएम धामी का संकल्प बना हकीकत

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार का “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान प्रदेश में सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की नई मिसाल पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री की स्पष्ट नीति—’सरकार को जनता के द्वार तक पहुँचाना’—आज धरातल पर पूरी मजबूती के साथ दिखाई दे रही है।

आज, 26 दिसंबर 2025 को प्रदेश भर में आयोजित विशेष शिविरों ने जनसेवा के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

सुशासन के आंकड़े: एक नज़र में

आज प्रदेश के सभी 13 जनपदों में आयोजित शिविरों के परिणाम कुछ इस प्रकार रहे:

विवरण आंकड़े
कुल आयोजित शिविर 126
लाभान्वित नागरिक 64,960
प्राप्त शिकायतें 10,962
त्वरित निस्तारण 7,952
प्रमाण पत्र/सरकारी लाभ जारी 12,399
अन्य योजनाओं का लाभ 39,923

मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: “लापरवाही पर ज़ीरो टॉलरेंस”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसेवा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

“मेरी सरकार का संकल्प स्पष्ट है—जनता को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के प्राप्त कर सके।”पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

अधिकारियों के लिए विशेष निर्देश:

  • घर-घर पहुँच: जो दिव्यांग, वृद्ध या कमजोर व्यक्ति शिविर तक नहीं आ सकते, अधिकारी स्वयं उनके घर जाकर सेवा प्रदान करें।

  • वास्तविक समाधान: शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर प्रभावी होना चाहिए।

  • कठोर कार्रवाई: टालमटोल या उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • फीडबैक सिस्टम: प्रत्येक जनपद में फीडबैक आधारित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुशासन की नई पहचान

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं है, बल्कि यह सरकार और जनता के बीच विश्वास का एक मजबूत सेतु बन गया है। मुख्यमंत्री धामी की जवाबदेही और ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति ने उत्तराखंड को देश में सुशासन के एक ‘मॉडल राज्य’ के रूप में स्थापित कर दिया है।

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