जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार”: शासन और जनता के बीच मिटी दूरियाँ, बढ़ा विश्वास 45 दिन, 13 जिले और हर घर तक पहुँचती सुविधाएँ

उत्तराखण्ड की पावन भूमि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सेवा और समाधान की एक नई लहर चल रही है। राज्य सरकार ने “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करने का एक ऐतिहासिक बीड़ा उठाया है। 17 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ यह अभियान आज प्रदेश के कोने-कोने में सुशासन, संवेदनशीलता और जवाबदेही का प्रतीक बन गया है।

प्रशासन अब आपके द्वार: अभियान का मुख्य उद्देश्य

मुख्यमंत्री धामी का स्पष्ट विजन है कि राज्य के नागरिकों, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इस अभियान का मूल मंत्र है:

  • त्वरित समाधान: जनसमस्याओं का मौके पर ही निस्तारण।

  • सरल सेवाएँ: सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुँचाना।

  • पारदर्शिता: शासन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना।

  • जन-विश्वास: सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद से आपसी विश्वास को मजबूत करना।


45 दिनों का महाभियान: न्याय पंचायत से ग्राम पंचायत तक

यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा का एक महायज्ञ है जो प्रदेश के सभी 13 जनपदों में निरंतर जारी है।

  • बहुउद्देश्यीय शिविर: 45 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के तहत न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

  • मौके पर निस्तारण: शिविरों में प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है, जिससे शिकायतों का तत्काल समाधान हो रहा है। जो मामले जटिल हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से हल करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • व्यापक भागीदारी: अब तक आयोजित सैंकड़ों शिविरों में लाखों नागरिक भाग ले चुके हैं, जो इस पहल की सफलता का प्रमाण है।

एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएँ

इन शिविरों के माध्यम से नागरिकों को निम्नलिखित प्रमुख सेवाएं प्रदान की जा रही हैं:

  1. प्रमाण पत्र: आय, जाति, निवास और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन और वितरण।

  2. सामाजिक सुरक्षा: वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं का पंजीकरण।

  3. आर्थिक सहायता: केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ।

  4. रोजगार व आजीविका: युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी और सहायता।

मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी और सक्रियता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं इस अभियान की कमान संभाले हुए हैं। उन्होंने न केवल विभिन्न जनपदों में जाकर शिविरों का औचक निरीक्षण किया, बल्कि आम जनता के बीच बैठकर उनकी पीड़ा सुनी और मौके पर ही अधिकारियों को निस्तारण के आदेश दिए।

“हमारी सरकार का लक्ष्य ‘अंत्योदय’ है—यानी समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना। यह अभियान सुशासन का एक ऐसा मॉडल है जहाँ प्रशासन खुद चलकर जनता के पास जाता है।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के स्तर से भी इस पूरे अभियान की डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर शिकायत का संतोषजनक समाधान मिले।

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान उत्तराखण्ड में एक नई कार्य-संस्कृति को जन्म दे रहा है। यह पहल न केवल समस्याओं को हल कर रही है, बल्कि राज्य के विकास में जन-भागीदारी को भी बढ़ा रही है। आज उत्तराखण्ड का नागरिक महसूस कर रहा है कि सरकार वास्तव में उसकी अपनी है और उसके द्वार पर खड़ी है।

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