उत्तराखंड में मदरसों का साप्ताहिक अवकाश अब रविवार को, 76 संस्थानों को स्कूल की मान्यता

देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में अब शुक्रवार के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश होगा। इन संस्थानों को शिक्षा विभाग और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

राज्य सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी बच्चों को समान अवसर, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के अनुरूप पढ़ाई कर भविष्य में बेहतर अवसर हासिल कर सकें।

मदरसा बोर्ड की जगह नई व्यवस्था, 76 संस्थानों को मान्यता

सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके अंतर्गत विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुरूप मान्यता देने की प्रक्रिया चल रही है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पहले उत्तराखंड मदरसा बोर्ड से 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे। नई व्यवस्था के तहत अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी जा चुकी है, जबकि 114 आवेदन शिक्षा विभाग में प्रक्रियाधीन हैं।

हरिद्वार में सबसे अधिक 44 संस्थानों को मिली मान्यता

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, प्रदेश के चार जिलों में 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी गई है।

  • हरिद्वार: 44 संस्थान
  • ऊधमसिंह नगर: 24 संस्थान
  • देहरादून: 6 संस्थान
  • नैनीताल: 2 संस्थान

मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इनमें साप्ताहिक अवकाश और शैक्षिक संचालन से संबंधित व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। आवश्यक मान्यता और अनुमति के बिना किसी संस्थान को संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।

250 अवैध मदरसों पर कार्रवाई का दावा

अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, राज्य सरकार पहले चरण में 250 अवैध मदरसों को सील कर चुकी है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि ये संस्थान मदरसा बोर्ड में भी पंजीकृत नहीं थे। कुछ संस्थानों में दूसरे राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षण संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करना होगा और बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा तथा भविष्य से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नियमों का पालन सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य: सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार सभी बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त स्कूलों पर विभाग के निर्धारित नियम समान रूप से लागू होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमों और शैक्षिक मानकों की अवहेलना करने वाले संस्थानों को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड का प्रत्येक बच्चा आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त करे तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

सरकार के इस निर्णय से मान्यता प्राप्त मदरसों की शैक्षिक व्यवस्था में बदलाव होगा। हालांकि, नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन और सभी संबंधित संस्थानों में नियमों के पालन पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।