फाइलें छोड़ीं, मैदान चुना: जब शिकायतकर्ता के दरवाजे जा पहुंचे मुख्यमंत्री धामी, सिस्टम में मचा हड़कंप

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासन में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय की औपचारिक समीक्षा बैठक को दरकिनार कर सीधे ‘ग्राउंड जीरो’ पर उतरने का फैसला किया। यह केवल एक निरीक्षण नहीं था, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले के लिए एक कड़ा संदेश था कि अब सरकार फाइलों के आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीन पर जनता की संतुष्टि से चलेगी।

रूटीन तोड़कर ‘सरप्राइज मूव’: सचिवालय से सीधे जाखन की गलियों में

सचिवालय में अधिकारी सीएम हेल्पलाइन-1905 की फाइलों के साथ मुख्यमंत्री का इंतजार कर रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपना काफिला तैयार कराया और सीधे राजपुर रोड स्थित जाखन क्षेत्र पहुंच गए। मुख्यमंत्री बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे शिकायतकर्ता विवेक मदान के घर पहुंचे। मुख्यमंत्री को अपने द्वार पर देख न केवल शिकायतकर्ता हैरान रह गया, बल्कि साथ चल रहे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।

भ्रष्टाचार और लापरवाही की खुली पोल: धंसी टाइल्स और लटकती तारें

मौके पर मुख्यमंत्री ने वह कड़वी सच्चाई देखी जो अक्सर कागजी रिपोर्टों में दब जाती है। विद्युत लाइन को अंडरग्राउंड करने के नाम पर फुटपाथ को खोदकर छोड़ दिया गया था, टाइल्स धंस चुकी थीं और कई जगहों पर बिजली के तार खुले में लटके थे। मुख्यमंत्री ने इसे जनसुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ बताते हुए अधिकारियों को मौके पर ही आड़े हाथों लिया।

“अगर हादसा होता तो कौन जिम्मेदार होता?”: अधिकारियों पर बरसे मुख्यमंत्री

ग्राउंड जीरो पर मुख्यमंत्री का तेवर सख्त था। उन्होंने अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे:

  • “जनता की सुविधा के नाम पर काम हो रहा है या सिर्फ कागजों में खानापूर्ति?”

  • “घटिया गुणवत्ता के साथ काम किसने पास किया?”

  • “अगर यहां कोई हादसा हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?”

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लापरवाही अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों व एजेंसियों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

सचिवालय की बैठक का बदला स्वरूप: अब कागजी रिपोर्ट नहीं, फील्ड वेरिफिकेशन अनिवार्य

जब मुख्यमंत्री निरीक्षण के बाद वापस सचिवालय पहुंचे, तो समीक्षा बैठक का मिजाज पूरी तरह बदल चुका था। उन्होंने अधिकारियों से दो-टूक कहा, “आज मैं फाइलों से पहले जमीन की सच्चाई देखकर आया हूं।” उन्होंने निर्देश दिए कि अब सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज हर शिकायत का ‘फील्ड वेरिफिकेशन’ अनिवार्य होगा। केवल औपचारिक निस्तारण दिखाकर फाइलों को बंद करने की प्रवृत्ति अब खत्म होनी चाहिए।

विभागों के बीच समन्वय की कमी पर नाराजगी

मुख्यमंत्री ने एक ही सड़क को बार-बार खोदे जाने (सड़क, बिजली, पानी के समन्वय की कमी) पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विभागों की आपसी खींचतान का खामियाजा जनता क्यों भुगते? उन्होंने स्पष्ट आदेश दिए कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों—विशेषकर विद्युत और सड़क—को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और बार-बार होने वाली खुदाई को तत्काल रोका जाए।

संदेश साफ: केवल शिकायत केंद्र नहीं, सक्रिय तंत्र है ‘1905’

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि सीएम हेल्पलाइन-1905 अब केवल एक कॉल सेंटर नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी में चलने वाला एक मारक और प्रभावी तंत्र बन चुका है। ‘धाकड़ धामी’ के इस एक्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि शासन अब जनता के प्रति जवाबदेह होगा और लापरवाही बरतने वालों के लिए व्यवस्था में कोई जगह नहीं होगी।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *