‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’: CM धामी ने किया पुस्तक का विमोचन, रंगकर्मी ताई तुगुंग को मिला सम्मान

देहरादून:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के सोशल बलूनी स्कूल में आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” का विमोचन किया। साथ ही, अरुणाचल प्रदेश के विख्यात अभिनेता, रंगकर्मी एवं नाटककार ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ से सम्मानित किया।

अरुणाचल के ताई तुगुंग को संस्कृति सम्मान

मुख्यमंत्री ने सम्मान प्राप्तकर्ता ताई तुगुंग को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने न्यीशी भाषा, रंगकर्म और फिल्मों (जैसे चर्चित नाटक ‘लप्या’ और कांस फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित फिल्म ‘संगी माई’) के जरिए पूर्वोत्तर की संस्कृति को वैश्विक मंच प्रदान किया है। उन्होंने नेगी जी को राज्य की सांस्कृतिक पहचान का पुरोधा बताते हुए उनके दीर्घायु जीवन की कामना की।

लोक संस्कृति और कलाकारों के संवर्धन के लिए राज्य सरकार के बड़े कदम

  • पेंशन दोगुनी की: लोककला और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले वरिष्ठ व आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों और साहित्यकारों की मासिक पेंशन ₹3,000 से बढ़ाकर ₹6,000 प्रतिमाह कर दी गई है, जिससे 180 कलाकार लाभान्वित हो रहे हैं।
  • कलाकारों का सूचीबद्धकरण: प्रक्रिया को सरल बनाते हुए 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया गया है, जिससे उन्हें रोजगार और मंच मिल रहे हैं।
  • पारंपरिक वाद्ययंत्र वितरण: ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्ययंत्रों से जुड़े पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष मुफ्त वाद्ययंत्र और वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है।
  • साहित्य पुरस्कार एवं अनुदान:
    • ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ (सम्मान राशि ₹5 लाख)
    • ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ (सम्मान राशि ₹5.51 लाख)
    • ‘उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’ के तहत अब तक 57 साहित्यकार सम्मानित हो चुके हैं और 2022 से अब तक 102 लेखकों को पुस्तक प्रकाशन हेतु वित्तीय अनुदान दिया गया है।
  • गुरु-शिष्य परंपरा: नई पीढ़ी को लोककला सिखाने के लिए 6 माह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड को केवल पर्यटन ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

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