सशक्तिकरण का उत्सव: देहरादून में ‘दिव्य कला मेला’ का भव्य समापन; दिव्यांग उद्यमियों ने दर्ज की ₹50 लाख की रिकॉर्ड बिक्री

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में दिव्यांगजनों के कौशल, कला और उद्यमशीलता को समर्पित “दिव्य कला मेला” रविवार को हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। 21 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक चले इस 9 दिवसीय आयोजन ने न केवल दिव्यांग कलाकारों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि समाज में समावेशन और आत्मनिर्भरता का एक नया उदाहरण भी पेश किया।

आर्थिक सशक्तिकरण: ₹50 लाख का कारोबार

मेले की सबसे बड़ी सफलता इसके आर्थिक परिणामों में देखी गई। समापन अवसर पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मेले के दौरान दिव्यांग उद्यमियों द्वारा लगभग ₹50 लाख की कुल बिक्री दर्ज की गई। यह राशि दर्शाती है कि यदि सही अवसर और विपणन मंच मिले, तो दिव्यांगजन देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

16 राज्यों की कला का अनूठा संगम

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित इस मेले में देश के 16 से अधिक राज्यों के दिव्यांग उद्यमियों और कलाकारों ने शिरकत की। मेले में प्रदर्शित उत्पादों की विविधता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया:

  • हस्तशिल्प एवं टेक्सटाइल: जूट, बांस के उत्पाद और आकर्षक वुडक्राफ्ट।

  • कला एवं सज्जा: उत्कृष्ट पेंटिंग्स और पारंपरिक वस्त्र।

  • खाद्य एवं जैविक उत्पाद: ऑर्गेनिक उत्पाद और गुणवत्तापूर्ण पैकेज्ड खाद्य सामग्री।

मुख्य अतिथि का संबोधन: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

समापन समारोह में उत्तराखंड के वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने स्टालों का भ्रमण कर दिव्यांगजनों के जज्बे की सराहना की।

“यह मेला केवल उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के अदम्य साहस और स्वावलंबन का प्रतीक है। ₹50 लाख की बिक्री यह सिद्ध करती है कि हमारे दिव्यांग भाई-बहन किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।”श्री सुबोध उनियाल, वन मंत्री

आयोजन के मुख्य उद्देश्य

भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा समर्थित इस मेले के चार प्रमुख स्तंभ रहे:

  1. विपणन मंच: दिव्यांग उद्यमियों को सीधे ग्राहकों से जोड़ना।

  2. स्वरोजगार: स्वरोजगार की दिशा में नए अवसरों की पहचान करना।

  3. कौशल उन्नयन: कलाकारों के कौशल को प्रोत्साहित करना।

  4. सामाजिक समावेशन: दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी दिलाना।

गरिमामयी उपस्थिति

समारोह में विशिष्ट अतिथियों के रूप में विधायक श्री खजानदास, सचिव संस्कृत शिक्षा श्री दीपक गैरोला, आयुक्त (दिव्यांगजन सशक्तिकरण) श्री प्रकाश चंद्र, और भारत सरकार के निदेशक (दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग) श्री प्रदीप सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

देहरादून का ‘दिव्य कला मेला’ समावेशी विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस आयोजन ने यह संदेश दिया है कि शारीरिक बाधाएं प्रतिभा को नहीं रोक सकतीं। सरकार और समाज के सामूहिक सहयोग से दिव्यांगजन ‘विकसित भारत’ के संकल्प में बराबर के साझीदार बन रहे हैं।

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