मिशन चारधाम 2026: ड्रोन की निगरानी में होगा कचरा; प्लास्टिक मुक्त देवभूमि के लिए धामी सरकार का मेगा प्लान

देहरादून: हिमालयी पर्यावरण को संरक्षित करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत’ विजन को धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा 2026 को पूर्णतः ‘सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीएम ने स्पष्ट किया कि इस बार यात्रा मार्ग पर तकनीक और जनभागीदारी का ऐसा समन्वय दिखेगा जो देश के लिए एक मॉडल बनेगा।

हाईटेक सर्विलांस: ड्रोन और कमांड सेंटर से होगी कचरे की घेराबंदी

चारधाम यात्रा के दुर्गम रास्तों पर कूड़े के ढेर अब प्रशासन की नजरों से बच नहीं पाएंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि कचरे और प्लास्टिक वेस्ट की मॉनिटरिंग के लिए ड्रोन तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही एक अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित होगा, जो सीधे तौर पर ग्राम पंचायतों और नगर निकायों से जुड़ा होगा। यह सेंटर रियल-टाइम डेटा के आधार पर सफाई व्यवस्था की निगरानी करेगा।

इकोनॉमिक मॉडल: ‘मनी बैक’ स्कीम और डिजिटल रिफंड सिस्टम लागू

प्लास्टिक के विरुद्ध छिड़ी इस जंग में सरकार अब ‘इंसेंटिव’ मॉडल का सहारा लेगी। मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश में “मनी बैक” योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

  • डिजिटल डिपॉजिट रिफंड: प्लास्टिक बोतलों के प्रबंधन के लिए एक डिजिटल सिस्टम होगा, जिसे पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड संचालित करेगा।

  • अनिवार्य प्रबंधन: हर दुकान पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट को अनिवार्य कर दिया गया है। जो कूड़ा फैलाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

विकल्प पर जोर: प्लास्टिक बोतलों की जगह लेंगे वाटर एटीएम और RO प्लांट

सिर्फ पाबंदी नहीं, बल्कि सरकार समाधान पर भी ध्यान दे रही है। प्लास्टिक की बोतलों को हतोत्साहित करने के लिए यात्रा मार्ग पर जगह-जगह वाटर एटीएम और RO प्लांट स्थापित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराकर प्लास्टिक कचरे के उत्पादन को शुरुआती स्तर पर ही रोकने की रणनीति है।

वेस्ट-टू-वेल्थ: लीद और पिरूल से बनेंगे पैलेट्स

एक बड़े नवाचार के तहत, यात्रा मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों की लीद के निस्तारण की समस्या का समाधान निकाला गया है। लीद का ‘वैल्यू एडिशन’ करते हुए उसे पिरूल (चीड़ की पत्तियां) के साथ मिलाकर ‘पैलेट’ तैयार किए जाएंगे। यह कचरा प्रबंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी और पर्यावरण-अनुकूल कदम साबित होगा।

मैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर: 37 एमआरएफ केंद्र और 266 कचरा वाहन तैनात

सफाई व्यवस्था को केवल नारों तक सीमित न रखकर धरातल पर मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है:

  • मशीनीकरण: 38 प्लास्टिक कम्पैक्टर/बेलिंग मशीनें और 299 कम्पोस्ट पिट तैयार हैं।

  • मैनपावर: बड़ी संख्या में ‘पर्यावरण मित्र’ और स्पेशलाइज्ड मैनपावर की तैनाती की गई है।

  • लॉजिस्टिक्स: 266 कचरा परिवहन वाहनों के माध्यम से कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।

श्रद्धालु सुविधा: 28 हजार कमरे और ‘क्विक रिस्पांस टीम’ सक्रिय

यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं:

  • आवास: होटल, धर्मशालाओं और आश्रमों में लगभग 67,278 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है।

  • स्वच्छता: महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए पृथक सुविधाओं के साथ 74 मोबाइल शौचालय संचालित होंगे।

  • फीडबैक: पूरी यात्रा को पारदर्शी बनाने के लिए QR कोड आधारित फीडबैक प्रणाली और त्वरित सहायता के लिए Quick Response Team (QRT) को तैनात किया गया है।

मुख्यमंत्री धामी का यह विजन चारधाम यात्रा को केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि ‘हरित और सतत विकास’ (Sustainable Development) का एक वैश्विक उदाहरण बनाने की ओर अग्रसर है। इसमें NCC कैडेट्स, महिला मंगल दल और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी इसे एक जन-आंदोलन का रूप देगी।

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