देहरादून (सचिवालय): उत्तराखण्ड में सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने और यातायात नियमों के उल्लंघन पर कड़ाई से लगाम कसने के लिए धामी सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। सचिवालय में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंध समिति की द्वितीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें सड़क सुरक्षा कोष (Road Safety Fund) से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों को संस्तुति दी गई। इस बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने परिवहन, पुलिस, राज्य कर और खनन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया।
एएनपीआर कैमरों को लेकर एकीकृत कार्य योजना के निर्देश
मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने बैठक के दौरान सचिव परिवहन को पूरे प्रदेश के लिए एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों से संबंधित एक विस्तृत और एकीकृत कार्य योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यातायात नियमों के उल्लंघन, ओवरस्पीडिंग, टैक्स चोरी और अवैध खनन को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए परिवहन, पुलिस, राज्य कर एवं खनन विभाग चारों को इन कैमरों के डेटा एक्सेस की आवश्यकता है, इसलिए अलग-अलग काम करने के बजाय एक संयुक्त योजना तैयार की जानी चाहिए। इसके साथ ही, व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी बनाए रखने के लिए उन्होंने परिवहन विभाग और पुलिस विभाग द्वारा किए जा रहे चालानों की एक संकलित रिपोर्ट हर महीने मुख्य सचिव कार्यालय को अनिवार्य रूप से प्रेषित करने के निर्देश भी जारी किए।
विभागीय बजट को प्राथमिकता और कार्यों में डुप्लीकेसी पर रोक
सड़क सुरक्षा निधि के बजट प्रबंधन को लेकर मुख्य सचिव ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि रोड और साइनेज (यातायात संकेतकों) से संबंधित जितने भी नियमित और रूटीन कार्य हैं, वे लोक निर्माण विभाग (PWD) के स्तर पर ही किए जाएंगे। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को हिदायत दी कि वे अपने मैंडेट से जुड़े कार्यों को अपने विभागीय बजट से ही कराने को प्राथमिकता दें, और सड़क सुरक्षा से संबंधित ऐसे अनिवार्य कार्य जिनके लिए विभागीय बजट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, केवल उन्हीं के लिए सड़क सुरक्षा कोष से बजट का प्रावधान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कार्यों में किसी भी प्रकार की डुप्लीकेसी (दोहराव) को रोकने के लिए उन्होंने प्रस्तावों को मुख्य समिति के समक्ष प्रस्तुत करने से पूर्व एक उपसमिति गठित कर उनकी गहन जांच (स्क्रूटिनी) करने के निर्देश दिए।
सड़क सुरक्षा कोष की संपूर्ण वार्षिक कार्य योजना पर जोर
मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा के सभी आयामों— जैसे ब्लैक स्पॉट का सुधारीकरण, जागरूकता अभियान, और आपातकालीन चिकित्सा सहायता— को शामिल करते हुए सड़क सुरक्षा कोष की एक संपूर्ण वार्षिक कार्य योजना (Annual Action Plan) तैयार करने की बात कही। इस महत्वपूर्ण बैठक के अवसर पर राज्य के कई वरिष्ठ प्रशासनिक और विधि अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें मुख्य रूप से प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि श्री प्रदीप पंत, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्री बृजेश कुमार संत, डॉ. वी. षणमुगम, अपर सचिव श्रीमती निवेदिता कुकरेती एवं श्री रोहित मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
