देहरादून, 14 जुलाई 2026
उत्तराखंड में ‘भ्रष्टाचार मुक्त देवभूमि’ के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति को जमीन पर उतार दिया है। सीएम धामी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाला चाहे कोई छोटा कर्मचारी हो या कोई बड़ा ‘मगरमच्छ’, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इसी कड़ी में सरकार ने हरिद्वार जमीन खरीद घोटाले के मुख्य दोषियों पर अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई कर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
आंकड़े बोलते हैं: कार्रवाई का पूरा रिपोर्ट कार्ड
मुख्यमंत्री कार्यालय और विजिलेंस विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई कार्रवाई का डेटा इस प्रकार है:
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कुल गिरफ्तारियां: पिछले 5 सालों में भ्रष्टाचार, भर्ती परीक्षाओं में धांधली और रिश्वतखोरी के मामलों में 200 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
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विजिलेंस का शिकंजा: सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने बीते वर्षों में कुल 82 ट्रैप ऑपरेशन चलाकर 13 राजपत्रित (Gazetted) अधिकारियों सहित 94 भ्रष्टाचारियों को रंगे हाथों दबोचा है।
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सजा दिलाने में रिकॉर्ड: मजबूत पैरवी और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट से भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने की दर 71 प्रतिशत (Conviction Rate) तक पहुंच चुकी है।
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अवैध नियुक्तियों पर प्रहार: नियमों को ताक पर रखकर बैकडोर से की गई 228 तदर्थ (Ad-hoc) नियुक्तियों को निरस्त कर पारदर्शिता बहाल की गई है।
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नकल माफिया पर एक्शन: सख्त एंटी-चीटिंग कानून के तहत 80 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा गया, जिसके बाद 23,000 युवाओं को पारदर्शी नौकरियां मिलीं।
हरिद्वार जमीन घोटाला: बड़ी मछलियों पर पहली बार इतना बड़ा एक्शन
हाल ही में सामने आए हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में सीएम धामी के निर्देश पर विशेष ऑडिट और जांच कराई गई। घपले की पुष्टि होते ही मुख्यमंत्री ने सीधे शीर्ष स्तर के अधिकारियों पर गाज गिराई:
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आईएएस वरुण चौधरी: तत्कालीन नगर आयुक्त को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त (Dismissal) करने की संस्तुति केंद्र (DoPT) को भेजी गई है।
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आईएएस कर्मेंद्र सिंह: तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) को गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कठोर सजा (Major Punishment) की सिफारिश की गई है।
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पीसीएस अजयवीर सिंह: तत्कालीन एसडीएम के खिलाफ एडवर्स एंट्री दर्ज करने के साथ ही उनकी तीन सालाना वेतन वृद्धियां (Increments) रोकने के आदेश दिए गए हैं।
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अन्य 10 कर्मचारी: घोटाले में शामिल नगर निगम के 10 अन्य विभागीय कर्मियों व भू-माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रमुख सरकारी टूल्स
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1064 एंटी-करप्शन हेल्पलाइन: शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह गुप्त रखते हुए त्वरित कार्रवाई के लिए इस मोबाइल ऐप और टोल-फ्री नंबर को जारी किया गया है, जिस पर अब तक हजारों शिकायतें मिल चुकी हैं।
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ऑपरेशन कालनेमि: राज्य में छिपे छद्म वेशधारियों और संदिग्ध तत्वों की पहचान के लिए पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
“राजनीति और मुख्यमंत्री की कुर्सी मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। देवभूमि की अस्मिता, युवाओं का सुरक्षित भविष्य और जनता की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह जंग अंतिम छोर तक जारी रहेगी।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
