डिजिटल उत्तराखण्ड: मुख्यमंत्री धामी ने लॉन्च किए राजस्व विभाग के 6 पोर्टल, अब घर बैठे मिलेंगी खतौनी और ऋण जैसी सेवाएँ

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व परिषद द्वारा तैयार किए गए 6 महत्वपूर्ण वेब पोर्टल्स का शुभारंभ किया।

इन पोर्टलों के माध्यम से अब प्रदेश के नागरिकों को तहसील और दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति मिलेगी और राजस्व से जुड़ी जटिल प्रक्रियाएं एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

इन 6 पोर्टल्स का हुआ शुभारंभ:

  1. ई-भूलेख (अपडेटेड वर्जन): खतौनी की सत्यापित प्रति ऑनलाइन प्राप्त करने हेतु।

  2. भू-नक्शा: भूमि मानचित्रों को सार्वजनिक रूप से निःशुल्क देखने हेतु।

  3. भूलेख अंश: खातेदारों के पृथक अंश निर्धारण और फार्मर रजिस्ट्री हेतु।

  4. भू-अनुमति: उद्योग और कृषि के लिए भूमि क्रय/उपयोग की ऑनलाइन अनुमति हेतु।

  5. एग्री लोन: बैंकों से कृषि ऋण लेने और NOC प्राप्त करने की डिजिटल प्रक्रिया।

  6. ई-वसूली (ई-आरसीएस): राजस्व वसूली की ऑनलाइन ट्रैकिंग हेतु।

प्रमुख विशेषताएं और नागरिकों को लाभ

1. घर बैठे मिलेगी प्रमाणित खतौनी

ई-भूलेख पोर्टल के माध्यम से अब खतौनी की सत्यापित प्रति प्राप्त करने के लिए तहसील जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नागरिक घर बैठे मोबाइल या इंटरनेट के जरिए निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान कर डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति डाउनलोड कर सकेंगे। इससे समय और संसाधनों की भारी बचत होगी।

2. पारदर्शिता के लिए भू-नक्शा और भू-अनुमति

‘भू-नक्शा’ पोर्टल के तहत प्रदेश के कैडस्ट्रल मैप (भूमि मानचित्र) को सार्वजनिक डोमेन में डाल दिया गया है, जिसे कोई भी निःशुल्क देख सकता है। वहीं, ‘भू-अनुमति’ पोर्टल के जरिए उद्योगों और हरिद्वार-ऊधमसिंहनगर में कृषि व बागवानी हेतु भूमि खरीदने की अनुमति अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है।

3. किसानों के लिए ‘एग्री लोन’ और ‘भूलेख अंश’

  • एग्री लोन पोर्टल: किसानों के लिए बैंक ऋण की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है। ऋण चुकाने के बाद बैंक द्वारा एनओसी जारी करते ही भूमि से चार्ज स्वतः ही हट जाएगा।

  • भूलेख अंश पोर्टल: इसमें संयुक्त खातेदारों का अलग-अलग हिस्सा (अंश) निर्धारित किया जा रहा है। इससे ‘फार्मर रजिस्ट्री’ तैयार करने में मदद मिलेगी और भविष्य में जाति, लिंग व पहचान संख्या के साथ एक समेकित डेटाबेस तैयार होगा।

4. ई-वसूली पोर्टल

अब बैंक या विभाग अपने बकायेदारों से वसूली के मामले सीधे ऑनलाइन कलेक्टर को भेज सकेंगे। इसकी प्रत्येक स्तर पर ट्रैकिंग की जा सकेगी, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी राजस्व की वसूली तेज होगी।

मुख्यमंत्री का विजन: “सरलीकरण, समाधान और निस्तारण”

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखण्ड सरकार आईटी और एआई का अधिकतम उपयोग कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि:

“हमारी सरकार का संकल्प सरलीकरण और त्वरित निस्तारण है। इन पोर्टलों के माध्यम से हम प्रशासन को अधिक पारदर्शी बना रहे हैं ताकि आम आदमी को घर बैठे सेवाओं का लाभ मिल सके।”

समारोह में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव राजस्व एस.एन पांडेय, राजस्व परिषद की आयुक्त श्रीमती रंजना राजगुरु सहित एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी जनपदों के जिलाधिकारी और मंडलायुक्त भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े।

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