लखवाड़ बहुद्देश्यीय परियोजना: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने दिए कार्य में तेजी लाने के निर्देश, तय होगी टाइमलाइन

देहरादून। उत्तराखण्ड की महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित लखवाड़ बहुद्देश्यीय परियोजना को लेकर शासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने आज सचिवालय में परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना भारत सरकार और उत्तराखण्ड सरकार की उच्च प्राथमिकता में शामिल है, इसलिए इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य है।

लापरवाही बर्दाश्त नहीं: PERT चार्ट के साथ बनेगी टाइमलाइन

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने परियोजना की गति बढ़ाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए:

  • टाइमलाइन का निर्धारण: मुख्य सचिव ने सभी संबंधित संस्थानों को PERT Chart के साथ एक विस्तृत Time Line तैयार करने को कहा है, ताकि हर चरण की प्रगति को ट्रैक किया जा सके।

  • संसाधनों की उपलब्धता: निर्माण कार्यों में बाधा न आए, इसके लिए दक्ष मैन पावर, आधुनिक मशीनरी और निर्माण सामग्रियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

  • ड्राइंग और डिजाइन: उन्होंने हाइड्रो-मैकेनिकल ड्राइंग (Hydro-Mechanical Drawing) को शीघ्र उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

लगातार मॉनिटरिंग और समन्वय

परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव ने त्रि-स्तरीय निगरानी प्रणाली पर जोर दिया:

  1. पाक्षिक समीक्षा: प्रमुख सचिव ऊर्जा को प्रत्येक 15 दिन में कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  2. मुख्य सचिव स्तर पर निगरानी: मुख्य सचिव स्वयं भी नियमित रूप से इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना की प्रगति पर कड़ी नज़र रखेंगे।

  3. केंद्रीय मंत्रालयों से संवाद: विभिन्न स्वीकृतियों और फाइल प्रोसेसिंग में तेजी लाने के लिए संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

“परियोजना से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स और प्रभावितों से लगातार संवाद बनाए रखें। प्रशासन और यूजेवीएनएल (UJVNL) का समन्वय ही इस परियोजना को समय पर धरातल पर उतारेगा।” — श्री आनन्द बर्द्धन, मुख्य सचिव

लखवाड़ परियोजना: एक नज़र में

यमुना नदी पर बनने वाली यह परियोजना न केवल ऊर्जा उत्पादन बल्कि जल भंडारण की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित होगी:

  • बांध की ऊँचाई: 204 मीटर।

  • विद्युत उत्पादन क्षमता: 300 मेगावाट।

  • लाइव स्टोरेज क्षमता: 330.40 MCM (मिलियन क्यूबिक मीटर)।

  • लाभ: इस परियोजना से उत्तराखण्ड सहित कई पड़ोसी राज्यों को बिजली और पानी की आपूर्ति में बड़ा लाभ मिलेगा।

बैठक में प्रमुख उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, यूजेवीएनएल के एमडी डॉ. संदीप सिंघल, केंद्रीय जल आयोग (CWC) के प्रतिनिधि और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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