जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार: उत्तराखण्ड में सुशासन की सफलता के आंकड़े आए सामने, 2 लाख से अधिक लोगों की सहभागिता

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान प्रदेश में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की नई इबारत लिख रहा है। 09 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह कार्यक्रम न केवल जनसमस्याओं के समाधान का जरिया बना है, बल्कि जनता और सरकार के बीच भरोसे का सेतु भी साबित हुआ है।

शिविरों के माध्यम से ‘सेवा और समाधान’ का रिपोर्ट कार्ड

मुख्यमंत्री ने अभियान की प्रगति साझा करते हुए बताया कि प्रदेश के सभी 13 जनपदों में अब तक 297 कैंपों का सफल आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों की सफलता को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:

  • कुल सहभागिता: 2,13,341 नागरिकों ने शिविरों में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया।

  • शिकायतों का निस्तारण: कुल 24,247 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 16,458 शिकायतों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण किया गया।

  • प्रमाण पत्रों का वितरण: विभिन्न सरकारी प्रमाण पत्रों के लिए 33,158 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर त्वरित कार्यवाही की गई।

  • योजनाओं का लाभ: राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से 1,21,375 नागरिकों को सीधे लाभान्वित किया गया।

दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचा शासन

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सेवा, समाधान और संवेदनशीलता का महायज्ञ है। उन्होंने कहा:

“हमारा लक्ष्य है कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाला प्रत्येक नागरिक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। प्रशासन का जनता के द्वार तक पहुँचना यह सुनिश्चित करता है कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की आवाज़ भी सरकार तक पहुँच रही है।”

जनपदवार व्यापक जनभागीदारी

अभियान के तहत अल्मोड़ा, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, ऊधमसिंह नगर और देहरादून सहित सभी 13 जिलों में जनता का भारी उत्साह देखने को मिला है। मुख्यमंत्री ने इसे सरकार के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण बताया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जो भी शिकायतें लंबित हैं, उनका समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए।

भ्रष्टाचार मुक्त और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का संकल्प

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानती है। शिविरों के माध्यम से प्राप्त फीडबैक का उपयोग भविष्य की योजनाओं को और अधिक जनकेंद्रित बनाने में किया जा रहा है। सरकार की यह प्रतिबद्धता प्रदेश को सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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