बंगाल की राजनीति में महाभूकंप: TMC के 19 सांसदों की बगावत, शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान भी शामिल

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर और बगावत की आहट से सूबे की सियासत में महाभूकंप आ गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विधायकों के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के बड़ी संख्या में सांसदों के बागी होने की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच, अचानक 19 लोकसभा सांसदों की एक सूची सार्वजनिक हुई है, जिसके बाद से बंगाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल बेहद तेज हो गई है। इस चौंकाने वाली फेहरिस्त में अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसे कई हाई-प्रोफाइल और दिग्गज नाम शामिल हैं।

लोकसभा स्पीकर को सौंपा पत्र; अलग संसदीय गुट बनाने की तैयारी

सामने आ रही मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इन सभी बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से पूरी तरह अलग रुख अपना लिया है। बताया जा रहा है कि इन 19 सांसदों ने एकजुट होकर लोकसभा स्पीकर (अध्यक्ष) को बकायदा अपने हस्ताक्षरों के साथ एक पत्र सौंपा है। इस पत्र के जरिए इन सांसदों ने संसद के भीतर एक बिल्कुल अलग संसदीय गुट (Separate Parliamentary Group) के गठन के समर्थन में अपनी सहमति जताई है। बागी गुट का यह कदम साफ तौर पर पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के केंद्रीय नेतृत्व को एक खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस पूरे संवेदनशील घटनाक्रम और दावों पर अभी तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि, खंडन या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इन 19 सांसदों के नामों ने उड़ाई TMC की नींद

सामने आई इस बगावती सूची में टीएमसी के कई मजबूत और बड़े चेहरों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने चुनाव में पार्टी को शानदार जीत दिलाई थी। बगावत करने वाले इन 19 सांसदों की सूची उनके संसदीय क्षेत्रों के साथ इस प्रकार है:

  • शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)

  • यूसुफ पठान (बहरामपुर)

  • सायोनी घोष (जादवपुर)

  • दीपक अधिकारी – देव (घाटाल)

  • शताब्दी रॉय (बीरभूम)

  • काकोली घोष (बारासात)

  • रचना बनर्जी (हुगली)

  • जून मालिया (मेदिनीपुर)

  • माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)

  • जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)

  • खलीलुर रहमान (जंगीपुर)

  • अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद)

  • पार्थ भौमिक (बैरकपुर)

  • बापी हलदार (मथुरापुर)

  • मिताली बाग (आरामबाग)

  • कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)

  • अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)

  • डॉ. शर्मिला सरकार (वर्धमान पूर्व)

  • असित कुमार माल (बोलपुर)

ममता बनर्जी के लिए खड़ी हुई नई और बड़ी राजनीतिक चुनौती

संसद के भीतर 19 सांसदों का एक साथ बगावती सुर अख्तियार करना ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के रणनीतिक नेतृत्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि यह दावा पूरी तरह सही साबित होता है, तो संसद में टीएमसी की ताकत और उसकी आवाज काफी कमजोर हो जाएगी। इसके अलावा, आगामी दिनों में संसद में विभिन्न विधेयकों और राजनीतिक मुद्दों पर मतदान के दौरान भी पार्टी नेतृत्व के लिए व्हिप जारी करना और इन सांसदों को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। बंगाल की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि यह दरार केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की आंतरिक राजनीति और पार्टी के संगठन पर भी दिखना तय है।