देहरादून: देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और हीट वेव (Heat Wave) के कारण बिजली की मांग में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस स्थिति को देखते हुए उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित कर प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के प्रबंध निदेशक श्री जीएस बुधियाल को राज्य में उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध (बिना कटौती के) बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर टूटे बिजली मांग के पुराने रिकॉर्ड
बैठक के दौरान यूपीसीएल के एमडी ने बिजली की मांग के चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए:
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राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड: गत 21 मई 2026 को पूरे भारत में बिजली की अधिकतम मांग लगभग 270.8 गीगावाट दर्ज की गई, जो मई 2024 के 250 गीगावाट के रिकॉर्ड से कहीं अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय स्तर पर यह मांग 270 से 277 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
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उत्तराखण्ड का ऑल-टाइम हाई: देश के साथ-साथ उत्तराखण्ड राज्य में भी 21 मई 2026 को अब तक की सर्वाधिक 2982 मेगावाटबिजली की मांग दर्ज की गई, जो राज्य के इतिहास में सबसे बड़ी डिमांड है।
₹10 प्रति यूनिट की अधिकतम दर के बावजूद एक्सचेंजों में बिजली की कमी
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर और मध्य भारत में सामान्य से अधिक तापमान होने के कारण घरेलू और कमर्शियल सेक्टरों में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इस अत्यधिक मांग के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पीक आवर्स के दौरान बिजली की उपलब्धता बेहद सीमित हो गई है। हालात यह हैं कि ऊर्जा एक्सचेंज (Energy Exchange) में बिजली की अधिकतम निर्धारित दर ₹10 प्रति यूनिट होने के बावजूद भी बाजार में पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
केंद्र से मिली राहत: उत्तराखण्ड को मिला 150 मेगावाट अतिरिक्त कोटा
इन विपरीत परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं लगातार विद्युत प्रबंधन की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के विशेष अनुरोध पर केंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड के लिए केंद्रीय पूल से आवंटित 250 मेगावाट बिजली के अलावा 150 मेगावाट का अतिरिक्त आवंटनमंजूर किया है, जिससे प्रदेश को बड़ी राहत मिली है। इसके अतिरिक्त, यूपीसीएल ने अग्रिम व्यवस्था के तहत ऊर्जा एक्सचेंजों के माध्यम से 1 से 15 मई तक 100 मेगावाट और 16 से 31 मई 2026 तक 225 मेगावाट अतिरिक्त बिजली का इंतजाम किया है।
राज्य में अब तक कोई रोस्टिंग नहीं, केंद्रीय गैस आधारित बिजली पर भी नजर
मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (ऊर्जा) के मार्गदर्शन में यूपीसीएल रियल-टाइम मॉनिटरिंग और बेहतर ग्रिड समन्वय के जरिए आपूर्ति सुचारु बनाए हुए है। प्रभावी प्रबंधन का ही परिणाम है कि मई के अंत तक प्रदेश में कहीं भी बिजली की रोस्टिंग (कटौती) नहीं की गई है। हालांकि, पिछले 2-3 दिनों में पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बारिश और बर्फबारी के कारण जल विद्युत उत्पादन (Hydro Power Generation) में 4 मिलियन यूनिट की कमी आई है, लेकिन आगामी दिनों में इसके तेजी से बढ़ने की संभावना है। यूपीसीएल केंद्रीय गैस आधारित विद्युत की शेड्यूलिंग के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है।
उपभोक्ताओं से पीक आवर्स में बिजली बचाने की अपील
सरकार और बिजली विभाग ने राज्य के समस्त उपभोक्ताओं से देश और राज्य के हित में सहयोग करने की अपील की है। उपभोक्ताओं से कहा गया है कि वे पीक आवर्स (शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक) के दौरान ऊर्जा का किफायती उपयोग करें। इस समय के दौरान एयर कंडीशनर (AC) और वाशिंग मशीन जैसे अधिक बिजली खपत वाले उपकरणों का यथासंभव न्यूनतम उपयोग करें ताकि ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव (उत्तराखण्ड शासन) डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, यूपीसीएल के एमडी श्री जीएस बुधियाल, मुख्य अभियंता (वाणिज्य) श्री एनएस बिष्ट, अधीक्षण अभियंता श्री नवीन मिश्रा, अधिशासी अभियंता श्री मनोज अग्रवाल तथा मैसर्स मर्काडोस से श्री आकाश शर्मा उपस्थित रहे।
