देहरादून: मुख्यमंत्री आवास का प्रांगण आज उत्तराखंड की लोक-संस्कृति के सतरंगी रंगों में सराबोर नजर आया। अवसर था ‘होली मिलन समारोह’ का, जहाँ प्रदेश भर से आए लोक कलाकारों और होल्यारों ने अपनी पारंपरिक धुनों से पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। यह आयोजन केवल रंगों का मेल नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक एकता और समृद्ध विरासत का एक भव्य दर्शन बन गया।
1. लोक धुनों का संगम: जौनसार से राठ तक
पूर्वाह्न से ही मुख्यमंत्री आवास में ढोल-दमाऊं और मंजीरों की थाप गूंजने लगी थी। प्रदेश के अलग-अलग कोनों से आए कलाकारों ने अपनी विशिष्ट पहचान के साथ समां बांध दिया:
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जौनसारी रंग: जौनसार-बावर से आए कलाकारों ने अपने पारंपरिक हारुल नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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कुमाऊँनी होली: कुमाऊं की टोली ने “आओ दगड़ियो, नाचा गावा, आ गई रंगीली होली” के सामूहिक आह्वान के साथ बैठकी और खड़ी होली का जादू बिखेरा।
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राठ का बसंत: पौड़ी जिले के सुदूर राठ क्षेत्र से आई सांस्कृतिक टोली ने “आई डान्ड्यू बसंत, डाली मा मौल्यार” गाकर पहाड़ों में बसंत के आगमन का सजीव चित्रण किया।
2. कलाकारों के संग थिरके मुख्यमंत्री
इस उत्सव की सबसे खास बात मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का सहज और आत्मीय अंदाज रहा। लोक कलाकारों को विशेष रूप से आमंत्रित किए जाने से कलाकार बेहद उत्साहित दिखे। मुख्यमंत्री न केवल उनके साथ रंगों में रंगे नजर आए, बल्कि लोक धुनों पर स्वयं भी थिरकने लगे।
मुख्यमंत्री की इस सक्रिय सहभागिता ने कलाकारों का मनोबल बढ़ाया और यह संदेश दिया कि राज्य का नेतृत्व अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।
3. लोक संस्कृति को मिल रहा नया संरक्षण
कार्यक्रम में पहुंचे विभिन्न क्षेत्रों के लोक कलाकारों और संस्कृति कर्मियों ने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की। उनका कहना था कि:
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राज्य सरकार लोक कलाकारों को उचित सम्मान और मंच प्रदान कर रही है।
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पारंपरिक लोक विधाओं के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्य सराहनीय हैं।
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आधुनिकता के दौर में विलुप्त होती परंपराओं को सरकारी आयोजनों में स्थान मिलने से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिल रही है।
4. विशिष्टता और एकता का दर्शन
मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इस होली मिलन ने सिद्ध किया कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विशिष्टता ही इसकी असली ताकत है। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की संगत और अलग-अलग बोलियों के गीतों ने यह अहसास कराया कि भौगोलिक दूरियों के बावजूद, संगीत और संस्कृति के धागे पूरे प्रदेश को एक सूत्र में पिरोते हैं।
अबीर-गुलाल और लोक गीतों के बीच संपन्न हुआ यह कार्यक्रम ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ का प्रतीक बना। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की खुशहाली और लोक संस्कृति के निरंतर संवर्धन का संकल्प दोहराया।
