कोलकाता, 9 मई: पश्चिम बंगाल में शनिवार को एक ऐसे युग का अंत हुआ जिसने दशकों तक राज्य की राजनीति को एक ही धुरी पर घुमाया था। कोलकाता के राजभवन में आयोजित एक भव्य और गरिमामय समारोह में सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुवेंदु के साथ पांच अन्य दिग्गज नेताओं—दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर राज्य में पहली भाजपा सरकार की नींव रखी।
तीन दशकों का तप: नगरपालिका से सचिवालय तक
सुवेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 15 दिसंबर 1970 को पूर्व मेदिनीपुर के करकुली गांव में जन्मे सुवेंदु ने 1995 में कांथी नगरपालिका के पार्षद के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। 20 वर्षों से अधिक के विधायी अनुभव के साथ, वे दो बार लोकसभा सांसद और तीन बार विधायक रहे। सिंचाई और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभालने का उनका अनुभव अब राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
नंदीग्राम से भवानीपुर तक: ‘जायंट किलर’ की छवि
सुवेंदु अधिकारी को भारतीय राजनीति में ‘जायंट किलर’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 2007 के नंदीग्राम आंदोलन का नेतृत्व कर 34 साल के वामपंथी शासन की चूलें हिला दी थीं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी जीत 2021 में नंदीग्राम और अब 2026 में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को सीधे मुकाबले में शिकस्त देना रही। 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने न केवल खुद को साबित किया, बल्कि राज्य में भाजपा को सत्ता के शिखर तक पहुँचाने में मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता सेनानी परिवार की विरासत
सुवेंदु अधिकारी का व्यक्तित्व उनके पारिवारिक इतिहास से भी गहराई से जुड़ा है। उनका परिवार स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही राष्ट्रसेवा में समर्पित रहा है। उनके पूर्वज बिपिन अधिकारी और केनाराम अधिकारी महान क्रांतिकारियों के सहयोगी थे और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान उनके घर को दो-दो बार जलाया गया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री शिशिर अधिकारी के पुत्र और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एम.ए. शिक्षित सुवेंदु ने अपनी पारिवारिक विरासत को अब ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाया है।
भविष्य की राह: चुनौतियों और उम्मीदों का नया बंगाल
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही सुवेंदु अधिकारी के सामने अब राज्य की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने और औद्योगिक विकास को गति देने की बड़ी चुनौती है। हल्दिया के विकास और सहकारिता आंदोलन में उनके पिछले कार्यों को देखते हुए जनता को उनसे काफी उम्मीदें हैं। भाजपा की इस जीत को राज्य में ‘राष्ट्रवाद’ और ‘अंत्योदय’ की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
