केदारनाथ धाम में स्वच्छता की नई मिसाल: प्लास्टिक मुक्त यात्रा की ओर बढ़ते कदम

पवित्र धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब और कचरा प्रबंधन की चुनौती

ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड तोड़ जनसैलाब उमड़ पड़ा है। तीर्थयात्रियों की इस भारी भीड़ के कारण धाम में प्लास्टिक कचरे, विशेषकर पानी की बोतलों का अंबार लगने की संभावना थी। इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए नगर पंचायत केदारनाथ ने पहले से ही ठोस रणनीति तैयार की थी, जिसके परिणामस्वरूप यात्रा के पहले एक सप्ताह में ही लगभग एक हजार किलो प्लास्टिक वेस्ट को सफलतापूर्वक एकत्रित और कॉम्पेक्ट कर लिया गया है।

मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी और वैज्ञानिक निस्तारण तकनीक

धाम में स्वच्छता बनाए रखने के लिए 3000 वर्ग फुट क्षेत्र में एक अत्याधुनिक मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) स्थापित की गई है। यहाँ एकत्रित होने वाले कचरे को केवल जमा नहीं किया जाता, बल्कि उसे प्लास्टिक, कांच, टिन और कपड़ों जैसी 15 अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाता है। इस केंद्र पर विशेष कॉम्पेक्टर मशीनें लगाई गई हैं, जो बिखरे हुए प्लास्टिक कचरे और बोतलों को भारी दबाव के साथ पिचकाकर 30 से 40 किलो की ठोस गठरियों में बदल देती हैं, जिससे इसका परिवहन सुगम हो जाता है।

वेस्ट टू वेल्थ: पर्यावरण संरक्षण के साथ राजस्व सृजन

नगर पंचायत की यह पहल न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रही है, बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभकारी सिद्ध हो रही है। अधिशासी अधिकारी श्री नीरज कुकरेती के अनुसार, एकत्रित किए गए प्लास्टिक और अन्य कबाड़ को बेचकर पंचायत को राजस्व प्राप्त होगा। कांच और टिन जैसे अन्य कचरे को भी सोनप्रयाग लाकर निस्तारित किया जा रहा है। इसके साथ ही, अब गीले कचरे के प्रबंधन के लिए पक्के पिट (गड्ढे) बनाने की योजना पर भी कार्य शुरू कर दिया गया है, ताकि स्वच्छता का चक्र पूर्ण हो सके।

सरकार की अपील और जनभागीदारी का महत्व

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र का हवाला देते हुए तीर्थयात्रियों से कूड़ा न फैलाने की विनम्र अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हिमालय और पवित्र नदियों की निर्मलता के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी बार-बार सिंगल यूज प्लास्टिक के त्याग का आह्वान कर चुके हैं। वर्तमान में 55 सफाई कर्मियों की टीम दो पालियों में कार्य कर रही है, जिससे भारी भीड़ के बावजूद केदारपुरी की सुंदरता और पवित्रता अक्षुण्ण बनी हुई है।

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