देहरादून: देहरादून नगर निगम की बोर्ड बैठक बुधवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच हुए तीखे विवाद और शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। मेयर सौरभ थपलियाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कुल 82 प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी, लेकिन गतिरोध के चलते मात्र नौ पार्षदों के प्रस्तावों पर ही बात हो पाई। भारी हंगामे को देखते हुए शाम पांच बजे बैठक को बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
इन तीन मुख्य प्रस्तावों पर लगी मुहर
सदन में हंगामे के बावजूद जनहित और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया:
-
किन्नरों की बधाई राशि का निर्धारण: शहर में अक्सर किन्नरों द्वारा मनमानी बधाई राशि मांगने की शिकायतों को देखते हुए सदन ने अब इसकी अधिकतम सीमा 5100 रुपये निर्धारित कर दी है।
-
पर्यावरण मित्रों का मानदेय: सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाले पर्यावरण मित्रों के मानदेय में 300 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
-
समान तैनाती: शहर के सभी वार्डों में पर्यावरण मित्रों की तैनाती समान रूप से करने का निर्णय लिया गया है ताकि सफाई व्यवस्था में भेदभाव न हो।
पोस्टर विवाद को लेकर सदन में घमासान
बैठक शुरू होते ही कांग्रेस पार्षद कोमल वोहरा के नेतृत्व में विपक्ष ने मेयर और नगर आयुक्त के आसन का घेराव किया। कांग्रेस पार्षदों का आरोप था कि हाल ही में हुई कांग्रेस की रैली के पोस्टर नगर निगम द्वारा जबरन हटाए गए। पार्षदों ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा। जब संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो विपक्ष ने सदन की कार्यवाही ठप करने की चेतावनी दी।
भाजपा-कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी नोंकझोंक
कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का भाजपा पार्षदों ने पुरजोर विरोध किया, जिसके बाद सदन युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। दोनों दलों के पार्षदों के बीच जमकर तीखी नोंकझोंक और नारेबाजी हुई। हंगामे के कारण सदन की मर्यादा तार-तार होती दिखी और विकास कार्यों से जुड़े अधिकांश प्रस्तावों पर चर्चा ही नहीं हो सकी। अंततः मेयर ने स्थिति को अनियंत्रित देख बैठक को अगले दिन तक के लिए टाल दिया।
