देहरादून। उत्तराखंड में छात्रसंघ चुनाव 2026-27 के नतीजों के बाद प्रदेश की छात्र राजनीति में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का प्रदर्शन चर्चा में है। 29 सितंबर को प्रदेश के 119 राजकीय महाविद्यालयों समेत कई विश्वविद्यालय परिसरों में हुए चुनावों के परिणाम सामने आए। अलग-अलग कॉलेजों में ABVP, NSUI और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, लेकिन कई प्रमुख संस्थानों में ABVP ने महत्वपूर्ण पदों पर सफलता हासिल की।
कई प्रमुख कॉलेजों में ABVP की जीत
देहरादून के DAV PG College में ABVP के नवदीप राणा ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। वहीं MKP PG College में ABVP ने छह में से पांच पदों पर जीत हासिल की। अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना परिसर में भी ABVP ने पांच साल बाद अध्यक्ष पद पर वापसी की।
मसूरी के MPG कॉलेज में ABVP ने अध्यक्ष, महासचिव और विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। वहीं उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ABVP के प्रत्याशियों ने सभी प्रमुख पदों पर निर्विरोध जीत हासिल की थी।
हालांकि प्रदेशभर के परिणामों को केवल ABVP की एकतरफा जीत के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। उदाहरण के तौर पर रुड़की के KLDAV PG College में NSUI ने छह में से चार पदों पर जीत दर्ज की, जबकि कुछ अन्य कॉलेजों में निर्दलीय और अन्य संगठनों के प्रत्याशी भी विजयी रहे।
छात्र राजनीति में ABVP बनाम NSUI की टक्कर
इस बार के चुनावों में कई कॉलेजों में ABVP और NSUI के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। SGRR PG College में अध्यक्ष और महासचिव समेत कुछ प्रमुख पदों पर दोनों संगठनों के प्रत्याशी आमने-सामने थे।
वहीं चुनाव परिणामों में क्षेत्रीय स्तर पर भी अंतर देखने को मिला। गढ़वाल और कुमाऊं के अलग-अलग कॉलेजों में ABVP, NSUI और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इससे साफ है कि छात्र राजनीति में कॉलेज और क्षेत्र के हिसाब से समीकरण अलग-अलग रहे।
छात्र राजनीति में महिला भागीदारी भी चर्चा में
इस बार छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं की भागीदारी को भी विशेष महत्व मिला। विभिन्न पदों में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रावधान किए जाने की बात सामने आई। इससे छात्रसंघ चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी प्रमुख रहा।
मुख्यमंत्री धामी ने विजयी प्रत्याशियों को दी बधाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छात्रसंघ चुनावों में ABVP के विजयी प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। चुनाव परिणामों के बाद भाजपा समर्थित छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?
उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में छात्रसंघ चुनावों के परिणामों को राजनीतिक दल और संगठन अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
ABVP के प्रदर्शन को संगठन के समर्थक युवाओं के बीच अपनी सक्रियता और प्रभाव के संकेत के तौर पर पेश कर सकते हैं। दूसरी ओर, छात्रसंघ चुनावों का मतदान विधानसभा चुनावों से अलग मुद्दों, स्थानीय समीकरणों और कॉलेज स्तर की राजनीति पर आधारित होता है। इसलिए इन परिणामों को सीधे 2027 विधानसभा चुनाव के परिणाम या किसी दल के पक्ष में जनादेश के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
फिलहाल इतना जरूर है कि उत्तराखंड के कॉलेज परिसरों में छात्र राजनीति एक बार फिर सक्रिय हुई है और इसके परिणामों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीतिक चर्चाओं को नई गति दी है।
