चेन्नई, 4 जून: लोकसभा चुनावों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता को एक बड़ा झटका लगा है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने आगामी 8 जून को नई दिल्ली में होने वाली ‘इंडी गठबंधन’ (INDIA Alliance) की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं होने का सनसनीखेज फैसला किया है। पार्टी ने इस कड़े कदम के पीछे तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस द्वारा किए गए कथित “विश्वासघात” और असहयोगात्मक रवैये को मुख्य वजह बताया है।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी के कारण लिया फैसला
डीएमके द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्हें 8 जून की बैठक में भाग लेने के लिए बाकायदा आमंत्रित किया गया था, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए शीर्ष नेतृत्व ने इस बैठक से पूरी तरह दूर रहने का निर्णय लिया है। पार्टी का स्पष्ट दावा है कि तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस के बदले हुए रुख और व्यवहार से डीएमके के जमीनी कार्यकर्ता बेहद आहत और नाराज हैं, जिसे राजनीतिक रूप से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
गठबंधन के प्रमुख स्तंभ होने का किया दावा
पार्टी ने अपने बयान में इस बात को रेखांकित किया कि ‘इंडी गठबंधन’ के गठन, उसकी रूपरेखा तैयार करने और उसे संचालित करने में डीएमके की केंद्रीय भूमिका रही है। शुरुआत से ही पार्टी इस विपक्षी एकजुटता के प्रमुख स्तंभों में से एक रही है। डीएमके ने यह भी कहा कि उनके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर हमेशा मुखर रहे हैं और गठबंधन को मजबूत करने में उनके योगदान को अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों ने भी समय-समय पर स्वीकार किया है।
संसद से सड़क तक इन मुद्दों पर रहा है विरोध
अपने वैचारिक रुख को साफ करते हुए डीएमके ने कहा कि वह लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और राज्यों के अधिकारों (Federalism) की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है। पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपने लंबे संघर्ष का जिक्र करते हुए निम्नलिखित मुद्दों पर अपने विरोध को दोहराया:
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राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) का विरोध।
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लोकसभा व विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) पर आपत्ति।
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नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ रुख।
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‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) प्रस्ताव का विरोध।
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वक्फ अधिनियम में संशोधन और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में बदलावों के खिलाफ आवाज उठाना।
पार्टी के अनुसार, इन सभी मुद्दों को लेकर उसने संसद के भीतर बहस, विधायी मंचों पर हस्तक्षेप, जनआंदोलनों और कानूनी लड़ाइयों जैसे सभी लोकतांत्रिक माध्यमों का लगातार सहारा लिया है।
भविष्य की रणनीति और विपक्ष का साथ
कांग्रेस की मौजूदगी वाली इस विशेष बैठक का बहिष्कार करने के बावजूद डीएमके ने साफ किया है कि वह राष्ट्रीय राजनीति से पूरी तरह अलग नहीं हो रही है। पार्टी ने कहा कि वह राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर देश के सामने अपनी आवाज उठाती रहेगी और विपक्षी खेमे तथा इंडी गठबंधन में उठने वाले महत्वपूर्ण विषयों पर समय-समय पर अपने विचार साझा करती रहेगी। हालांकि, 8 जून की बैठक से डीएमके की यह दूरी कांग्रेस और विपक्षी खेमे के बीच आपसी समन्वय पर कई बड़े सवाल खड़े करती है।
